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Motivational: 12वीं में 91% अंक और आंखों में आंसू… रुला देगी मौत को मात देने वाले सीकर के सचिन की ये कहानी

12th Class Student Sachin: सीकर जिले के थोरासी निवासी सचिन मील ने बीमारी और मौत जैसे हालात से जूझते हुए भी हार नहीं मानी। कभी डॉक्टरों ने जिनके लिए उम्मीद छोड़ दी थी, उसी सचिन ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 91.40 प्रतिशत अंक हासिल कर संघर्ष और हौसले की मिसाल पेश की है।

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सीकर

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Akshita Deora

Apr 06, 2026

Sikar Student

सचिन मील (फोटो: पत्रिका)

RBSE 12th Result 2026: मौत से लड़कर मेहनत व मंसूबों से मुकद्दर संवारने की ये मजबूत मिसाल है। महज तीन साल की उम्र में ओपन हार्ट सर्जरी के बाद से बीमारी में बीत रहे थोरासी निवासी सचिन मील के जीवन को जयपुर व अहमदाबाद तक के चिकित्सकों ने चंद दिनों का बताकर घर लौटा दिया था।

दवाएं बंद होने पर परिजन भी उम्मीद छोड़कर निराश हो गए थे। पर इसे कुदरत का करिश्मा कहें या सचिन की कुछ कर गुजरने की कशिश व कुव्वत कि बिना दवाओं के ही न केवल उसके स्वास्थ्य में सुधार होने लगा, बल्कि सरकारी स्कूल में पढ़कर उसने इस साल राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में आर्ट्स संकाय में 91.40 फीसदी अंकों के साथ कामयाबी का नया किला भी फतह कर दिया।

चिकित्सकों ने बताया मल्टी ओरगन फेलियर

सचिन के पिता सोहनलाल मील के अनुसार पैदा होने के बाद से ही बीमार रहने लगे सचिन की 2009 में दिल्ली एस्कोर्ट में ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी। उसके बाद भी वह लगतार बीमार रहता।

2019 में तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो पहले जयपुर और फिर अहमदाबाद के चिकित्सकों ने हार्ट, किडनी व फैंकड़े खराब बताते हुए कुछ दिनों का मेहमान करार देकर उसे घर भेज दिया। दवा भी बंद कर दी। घर लाने पर वह ऑक्सीजन पर ही रहने लगा। कोरोना काल आने पर कक्षा 7 व 8 में उसे प्रमोशन मिल गया।

तीन साल बिस्तर पर रहा जीवन, आस्था व मेहनत से मुकाम

बकौल पिता 2020 से सचिन के करीब तीन साल पूरी तरह बिस्तर पर ऑक्सीजन के सहारे टिका रहा। दवा बंद होने से उम्मीद भी खत्म हो चुकी थी। इसी बीच उन्होंने सालासर बालाजी की पदयात्राएं शुरू की। उनका मानना है कि इसी आस्था और विश्वास ने सचिन को नई जिंदगी दी।

धीरे-धीरे सचिन ने होश संभाला और फिर पढ़ाई की ओर कदम बढ़ाए। हालांकि 5.8 इंच कद के सचिन का वजन अब भी 37 किलो है। उसे उठने— बैठने में परेशानी के साथ उसे दैनिक कार्यों में भी परिजनों की सहायता लेनी पड़ती है।

प्रिंसिपल ने प्रवेश से किया मना, अब मनवाया लोहा

बकौल सोहनलाल कोरोना काल के बाद सचिन को गांव की स्कूल में बोर्ड का परिणाम खराब होने के डर से प्रवेश से मना कर दिया गया। फिर राउमावि पलथाना में पढ़ाई करवाई गई। वहां तबीयत ठीक रहने पर स्कूल के वाहन से जाता और बाकी कोर्स शिक्षक व्हाट्स एप के जरिए करवाते।

इससे उसने 10वीं में 84 फीसदी अंक हासिल किए। फिर आर्ट्स लेकर पढ़ाई व मेहनत जारी रख उसने 91.40 फीसदी का मुकाम हासिल किया। सचिन व सुभाष ने इस उपलब्धि का श्रेय पलथाना स्कूल के स्टाफ को दिया है।