
भोपाल। पिछले दिनों प्रदेश में हुए किसान आंदोलन और अब तक सामने आ रही उनकी परेशानियों के बाद अब नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेधा पाटकर अब किसान आंदालन से जुड़ेंगी। माना जा रहा है कि मप्र सरकार द्वारा सरदार सरोबर बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने और विस्थापितों के पुनर्वास किए जाने के बाद से मेधा मप्र में आंदोलन के लिए नई जमीन की तलाश में जुट गर्ईं थीं। इसी क्रम में छिंदवाड़ा में 11 दिसंबर को किसान महापंचायत के आंदोलन में बतौर मुख्य वक्ता शामिल होने वाली हैं।
इस आंदोलन में वे किसान शामिल होंगे जो 30 साल पहले 1986-87 में पेंच पॉवर प्रोजेक्ट के नाम पर हीवरखेड़ी, धनोरा, चौसरा, थावरीटेका तथा डागावानी, पिपरिया के किसानों की जमीन 6 हजार से 10 हजार रुपए एकड़ से यह कहकर अधिग्रहित की गई की प्रत्येक परिवार को नौकरी दी जाएगी व किसानों को मुफ्त में बिजली दी जाएगी इसके अलावा लागत मूल्य पर बिजली बेची जाएगी। लेकिन जमीन अधिग्रहण के बाद किसानों को कुछ नहीं मिला।
किसानों को इस बात पर आपत्ति है कि वर्ष 2010 में उक्त भूमि अदानी पॉवर प्लांट को 13.5 लाख रुपए एकड़ के हिसाब से बेच दी गई और आज दिनांक तक थर्मल पॉवर नहीं बना। अदानी ने सुप्रीम कोर्ट में यह लिखकर दे दिया है कि वह छिंदवाड़ा में थर्मल पॉवर नहीं बनाएगा।
अत: किसानों की जमीनें किसानों को वापस की जाए। अदानी पॉवर प्लांट को पानी देने के लिए मॉचागोरा बांध बनाया गया। जिसमें 31 गांव प्रभावित हुए तथा कई गांव डूब गए। किसानों को उचित मुआवजा भी नहीं दिया गया है। पुनर्वास स्थल पर मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नही है। मछली का ठेका भी सिवनी के ठेकेदार को दे दिया गया है। मछली आखेट करने तथा मछली का ठेका लेने के लिए एक भी कॉपरेटिव सोसाईटी रजिस्टर्ड नही की गई है।
किसानों के हित में मेधा रखीं ये मांग :
- अडानी पॉवर प्लांट से प्रभावित किसानों की जमीनें किसानों को वापस करो।
- किसानों की फसलें समर्थन मूल्य पर खरीदी करो।
- मछली का ठेका निरस्त करो तथा विस्थापित किसानों को मछली का ठेका दो।
- माचागोरा बांध का पानी छिंदवाड़ा जिले के समस्त किसानों को नहर के माध्यम से उपलब्ध कराओ।
- मछली आखेट हेतु मछुआरों की कॉपरेटिव सोसाईटी रजिस्टर्ड करो।
- मॉचागोरा बाँध से प्रभावित किसानों को सरदार सरोवर परियोजना का पैकेज दो।
Published on:
03 Dec 2017 04:09 pm
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