
भोपाल। कल देश के साथ ही मध्य प्रदेश में भी राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के लगभग सभी स्कूलों में संगोष्ठियां, सूचनात्मक सेमिनार, संगोष्ठियां और निबंध लेखन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आपको बता दें कि हर साल 11 नवंबर को देशभर में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि आखिर राष्ट्रीय शिक्षा दिवस क्यों मनाया जाता है? यह कैसे अस्तित्व में आया। अगर नहीं तो जरूर पढ़ें ये इंट्रेस्टिंग फैक्ट...
ऐसे अस्तित्व में आया राष्ट्रीय शिक्षा दिवस
सितंबर, 2008 में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के दिन को राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा दिवस के रूप में मनाए जाने पर मुहर लगाई थी। इसके बाद से ही यह दिन अस्तित्व में आया। मंत्रालय ने मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती को ही इस दिन के लिए इसलिए चुना क्योंकि आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण में शिक्षा के महत्व को देखते हुए इन्हीं कुछ नेताओं ने शिक्षा को महत्वपूर्ण बनाया। अबुल कलाम ऐसे नेता थे, जिन्होंने शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल शुरू की और उन्होंने ही सबसे आगे रह कर इस काम को संपन्न भी किया।
इसलिए बढ़ जाता है इस दिन का महत्व
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर देशवासी राष्ट्र निर्माण में मौलाना आजाद के योगदान को याद करते हैं। इस दिन को स्वतंत्र भारत में शिक्षा प्रणाली की नींव रखने में अबुल कलाम के योगदान को देखा जाता है। वहीं इस दिवस पर हर साल स्कूलों में विभिन्न रोचक और सूचनात्मक सेमिनार, संगोष्ठियों, निबंध-लेखन जैसी प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों आदि का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही छात्र और शिक्षक इस दिवस पर साक्षरता के महत्व और शिक्षा के सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श करते हैं। ऐसे कार्यक्रम और संगोष्ठियां न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेंगे, बल्कि उनके भविष्य के निर्माण में भी अहम योगदान देंगे।
मक्का में जन्मे आजाद 1890 में आए थे कलकत्ता
स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य नायक माने जाने वाले मौलाना अबुल कलाम का जन्म मक्का में हुआ था। मौलाना अबुल कलाम आजाद 1890 में परिवार के साथ कलकत्ता में शिफ्ट हो गए थे। जबकि इनके पूर्वज बाबर के शासन काल में ही भारत आ गए थे। केवल 13 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी। उनकी पत्नी का नाम जुलेखा बेगम था।
नेहरू सरकार में बने पहले शिक्षा मंत्री
मौलाना अबुल कलाम आजाद ने 1947 से 1958 के बीच पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार के दौरान पहले शिक्षा मंत्री के रूप में देश की सेवा की। वे एक समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और एक प्रख्यात शिक्षाविद् थे, जो शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की सोच रखते थे।
कई भाषाओं के जानकार थे आजाद
मौलाना आजाद अरबी, बंगाली, फारसी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं के जानकार थे। आजाद को उनके परिवार ने गणित, दर्शन, विश्व इतिहास और विज्ञान जैसे कई विषयों में भी गुणी शिक्षकों से प्रशिक्षित करवाया था।
किशोर अवस्था में ही बन गए थे पत्रकार
देश के पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद किशोरावस्था में ही पत्रकारिता में सक्रिय हो गए थे। साल 1912 में, उन्होंने साप्ताहिक उर्दू अखबार अल-हिलाल (द क्रिसेंट) प्रकाशित करना शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे कई संस्थानों की स्थापना की। गौरतलब है कि मौलाना आज़ाद का लेखन के प्रति स्वाभाविक झुकाव था और इसी के परिणामस्वरूप उन्होंने 1899 में मासिक पत्रिका नायरंग-ए-आलम की शुरुआत की थी।
ये भी जानें
* भारत में हर साल 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है।
* इस दिवस को भारत के पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।
* भारत के पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद एक स्वतंत्रता सेनानी थे।
* मौलाना अबुल कलाम आजाद विद्वान और प्रख्यात शिक्षाविद् के साथ ही स्वतंत्र भारत के प्रमुख वास्तुकारों में से एक थे।
* मौलाना अबुल कलाम आजाद ने ही ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन और ऐसे प्रमुख शिक्षा निकायों की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी।
* मौलाना अबुल कलाम आजाद इंजिप्ट, तुर्की, सीरिया और फ्रांस की यात्रा पर गए। यहां राजनेताओं से मिले। उसके बाद भारत लौटे और यहां प्रमुख हिंदू क्रांतिकारी अरविंदो घोष और श्याम सुंदर चक्रवर्ती से मिले।
* इनसे मिलने के बाद उन्होंने राजनीति को और गहराई से जाना और समझा। इसी का नतीजा रहा कि उन्हें भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बनने का मौका मिला।
* आजाद विदेशी क्रांतिकारी नेताओं के साथ ही भारतीय क्रांतिकारी नेताओं से भी उतना ही प्रभावित थे। इसी का नतीजा था कि उन्होंने अल-हिलाल मैगजीन का प्रकाशन शुरू किया। इस मैगजीन के माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश सरकार पर अटैक करना शुरू किए साथ ही ब्रिटिश सरकार की पॉलीसिज के कारण भारत की आम जनता को हो रही मुश्किलों को इस मैग्जीन से उजागर किया।
* इस मैग्जीन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उस समय में इसका सर्कुलेशन 26000 कॉपियों का था।
* बाद में ब्रिटिश सरकार ने इस साप्ताहिक मैग्जीन के प्रकाशन पर रोक लगा दी थी।
* अब आजाद ने दूसरी मैगजीन अल-बलाग की शुरुआत की।
* जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने इन्हें कलकत्ता से बाहर जाने के आदेश दे दिए।
* उसके बाद बिहार पहुंचे आजाद को ब्रिटिश सरकार ने नजरबंद कर लिया। प्रताडऩा का यह सिलसिला 31 दिसंबर 1919 तक चला।
* जनवरी 1920 में उन्हें रिहा कर दिया गया।
* रिहाई के बाद आजाद फिर से भारतीय राजनीति का हिस्सा बन गए और कई आंदोलनों में भाग लिया।
* उन्होंने एक बार फिर से ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लिखना शुरू कर दिया था।
Updated on:
10 Nov 2022 01:48 pm
Published on:
10 Nov 2022 01:46 pm
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