
National Education Policy
ऐसे में प्रथम और द्वितीय वर्ष पास कर चुके सभी विद्यार्थियों की जानकारी बरतउल्ला यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदेश के 495 कॉलेजों से मांगी गई है। डीजी लॉकर एक ऐप है, जिसमें विद्यार्थियों का डाटा रखा जा सकता है। लॉकर में डिग्री और ट्रांसक्रिप्ट भी स्टोर करके रखी जाएगी।
विदेश और अन्य राज्यों के छात्रों को होगा फायदा
तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों का डाटा डीजी लॉकर में अपडेट किया जाएगा। इसका फायदा उन स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा होगा जो विदेशों में नौकरी करने के लिए जाते हैं या फिर दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने जाते हैं। तो ऐसे में विद्यार्थियों का डाटा जांचने में आसानी होती है।
एनईपी वाले बीए, बीकॉम, बीएससी, बीबीए, बीसीए सहित अन्य यूजी कोर्स वाले विद्यार्थियों का डाटा पर काम हो रहा है। इनकी अंकसूची, नामांकन, माइग्रेशन, टीसी, आधार नंबर, जन्म तारीख आदि जानकारी शामिल है। इसमें यूजी फर्स्ट-सेकंड ईयर और फाइनल ईयर के 3 लाख से अधिक विद्यार्थीं शामिल हैं। प्रो. एसके जैन, कुलपति बीयू
बीयू को बनाया नोडल एजेंसी
यूजीसी के आदेश के बाद बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को डिजी लॉकर के लिए नोडल सेंटर बनाया गया है। प्रदेश के अन्य सभी विश्वविद्यालयों को अपना डाटा बीयू विश्वविद्यालय को भेजेगा होगा। उसके बाद एजेंसी डाटा को अपलोड करने का काम करेगी। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार इंदौर सहित कुछ विश्वविद्यालय में डाटा भेजा है उसे अपलोड करने का काम जारी है।
यूजीसी ने 2020 में जारी की थी गाइडलाइन
यूजीसी ने नेशनल डिपॉजिटरी स्कीम के तहत 4 साल पहले देशभर के विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों का डाटा डिजिटल करने पर जोर दिया। लेकिन स्थिति यह है कि अब तक इस पर काम नहीं हो सका है। यूजीसी की गाइडलाइन के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सभी विश्वविद्यालयों को एनईपी वाले विद्यार्थियों की जानकारी को डिजिटल प्रारूप में बदलने के आदेश जारी किए हैं।
देरी का यह है कारण
कॉलेज प्राचार्य के अनुसार विद्यार्थियों के कॉलेज ना आने के कारण दस्तावेज अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। दस्तावेजों के लिए छात्रों से संपर्क किया जा रहा है। कई छात्रों के नंबर बंद हैं, ऐसे में उनके दस्तावेज अपलोड करना चुनौती बना हुआ है।
Published on:
25 Feb 2024 10:39 am
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