1. इस मंदिर में चढाने के लिए विदेश से आती हैं चप्पलें

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यूं तो भगवान के मंदिर जाते समय जूते-चप्पल बाहर ही खोल दिए जाते हैं लेकिन भारत में एक मंदिर ऐसा भी है जहां मांगी गई मन्नत पूरी होने के बाद भगवान को जूते-चप्पल ही चढ़ाएं जाते हैं। जी हां यह एमपी के भोपाल के जीजी बाई का मंदिर में इस अनोखी परंपरा का पालन किया जाता है। यह मंदिर मा दुर्गा को समर्पित है। महराज ओम प्रकाश के अनुसार भक्त इस माता के लिए विदेशों से भी चप्पल भेजते हैं। यहां आने वाले कुछ लोग विदेश में जाकर बस गए हैं। महाराज ओम प्रकाश की मानें तो मां दुर्गा के लिए सिंगापुर और पेरिस से भी चप्पल आई है। जब भक्तों द्वारा चढ़ाई गई चप्पलों की संख्या बढ़ जाती है तो उसे लोगों में बांट दिया जाता है।
2. कोलकाटा के इस मंदिर में चढ़ती है चाऊमीन
काली मां का एक मशहूर मंदिर मां के रूप या उनके चमत्कार के लिए नहीं बल्कि चाइनीज फूड के प्रसाद के लिए दुनियाभर में मशहूर है। कोलकाता में स्थित तांगड़ा नामक कस्बे में बने इस मंदिर का नाम है चाइनीज काली मंदिर। बुद्धिज्म और क्रिश्चिनिटी को फॉलो करने वाले बड़ी संख्या में यहां रहते हैं। जो मां को नूडल्स, चाइनीज तरीके से पकी सब्जियां और फ्राइड राइस जैसे व्यंजन का भोग लगाते हैं।
3. जालंधर का एयरप्लेन मंदिर
जालंधर में दाओबा जिले में स्थित है एयरप्लेन गुरुद्वारा। नॉर्थ इंडिया के सबसे मशहूर इस मंदिर को एरोप्लेन गुरुद्वारा भी कहते हैं। माना जाता है कि साहिब बाबा निहाल सिंह गुरुद्वारे में आने वाले हर भक्त की इच्छा पूरी करते हैं। यहां आने वाले भक्त यहां अपनी इच्छा के मुताबिक तरह-तरह के एरोप्लेन यहां चढ़ाते हैं। गुरुद्वारे चारों ओर लगी दुकानों में प्लास्टिक के एरोप्लेन की कई वैराइटी और साइज में हमेशा उपलब्ध रहते हैं।
4. त्रिशुंड गणपति मंदिर
पुणे के सोमवार पेठ एरिया में स्थित त्रिशुंद गणपति मंदिर भी अपने आप में अनूठा है। यह मंदिर तीन सूंड वाले गणपति की प्रतिमा के लिए जाना जाता है। पूरे देश में इस तरह की यह एक ही प्रतिमा है। गणपति की तीन सूंड वाली इस प्रतिमा के कारण ही इसका नाम त्रिशुंड पड़ा। 1754-1770 ईस्वी के बीच स्थापित यह मंदिर केवल पत्थरों से बना है।
5. रावण मंदिर
हिन्दू धारणा के अकॉर्डिंग मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने कुकर्मी रावण का अंत किया था। राम हीरो तो रावण को विलियन माना जाता है। लेकिन कई भारतीय ऐसे हैं जो जैसे भगवान राम की पूजा-अर्चना करते हैं उसी तरह रावण को भी पूजते हैं। आराम करते रावण की 10 फीट लंबी प्रतिमा वाला यह मंदिर मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित है।
6. काली सिंह मंदिर
हमारी कई परम्पराओं और रिवाजों में मवेशियों की पूजा भी शामिल है। हम गाय को माता मानते हैं और यही कारण है कि मुख्य रूप से गाय को ही पूजा जाता है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक ऐसा ही मंदिर है काली सिंह मंदिर। यहीं पर रहने वाले एक पशुचिकित्सक की याद में बनाए गए इस मंदिर में भक्त दूध के साथ खीर का भोग लगाती हैं।
7. मनाली का हडिम्बा या हिडिम्बा मंदिर
भीम की पत्नी और घटोत्कच की मां का नाम था हिडिम्बा। हिन्दू मान्यता के अनुसार इन्हें सम्मान देने के लिए इस मंदिर की स्थापना की गई। मनाली का यह हिडिम्बा मंदिर अन्य मंदिरों की वास्तुकला से एकदम विपरीत है। लकड़ी से बना यह मंदिर तीन स्टोरी का है और पागोड़ा शैली में बना हुआ है। माना जाता है कि हिडिम्बा ने यहां ध्यान किया था, जिसके बाद वे देवी हिडिम्बा बनी।
8. विजा बाबा टेम्पल
इसका नाम ही बता रहा है कि इस मंदिर में आने वाले भक्तों को जरूर विजा से संबंधित कठिनाइयों से मुक्ति मिल जाती होगी। जी हां इसीलिए ये हैं विजा ग्रांटिंग बालाजी या भगवान वैंकटरेश्वर। हैदराबाद में स्थित इस मंदिर में आने वाले भक्तों की लंबी सूची में स्टूडेंट्स के अलावा ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं जो विजा संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए यहां मन्नत मांगने आते हैं। माना जाता है कि यूएसए विजा के लिए परेशान रहने वाले चैन्नई के कई स्टूडेंट्स ने 1980 में यहां प्रार्थना की और वह पूरी हो गई। इस ऐतिहासिक घटना ने इस मंदिर का नाम विजा बाबा टेम्पल हो गया।
9. भारत माता मंदिर
देशभक्ति का जज्बा भारतीयों में हमेशा से ही रहा है। इसे जताने का तरीका भी गजब का है। वाराणसी में देशभक्ति के ऐसे ही जज्बे से प्रेरित है भारत माता का मंदिर। मदर इंडिया के नाम से फेमस इस मंदिर का इनोग्रेशन खूद महात्मा गांधी ने 1936 में किया था। यह पूरा मंदिर मार्बल से तैयार भारत के नक्शे के बीच में बना है। यह मंदिर बाबु शिव प्रसाद सिंह गुप्त ने बनवाया था। जो हर भारतीय को गर्व महसूस कराता है।
10. कर्नाटक का डॉग टेम्पल
डॉग्स को बहुत प्यारा प्राणी माना जाता है। वे लॉयल, फैथफुल होते हैं। और यह सच भी है कि वे अपने मालिक को बहुत प्यार करते हैं, उनकी रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उनके फैथ की इसी क्वालिटी को सम्मान देने के लिए कर्नाटक की एक कम्यूनिटी ने एक डॉग् टेम्पल का निर्माण करवाया। यह कम्यूनिटी मानती है कि डॉग की यही वंडरफुल क्वालिटीज लोगों को भी मदद के लिए प्रेरित करती हैं। कह सकते हैं कि गलत करने वालों से लडऩा डॉग ही सिखाता है।