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बोन मैरो ट्रांसप्लांट का खर्च 15 लाख, मिले सिर्फ 2 लाख

मदद के लिए बढ़ाएं हाथ: आयुष्मान योजना में बीमारियों की सूची में शामिल नहीं है एप्लास्टिक एनीमिया

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भोपाल. पिछले दो साल से एप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही पत्रकारिता की छात्रा रानी अटूट को बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए 15 लाख रुपयों की जरूरत है। छात्रा की मदद के लिए उसके दोस्त और शहर के कुछ जागरूक नागरिक अभियान छेड़े हुए हैं। जहां सैकड़ों आम नागरिक छोटी-छोटी राशियों से इलाज के लिए जरूरी विशाल राशि जोडऩे में मदद कर रहे हैं वहीं केवल उम्मीद के दम पर गंभीर बीमारी से जूझ रही प्रतिभावान छात्रा को सरकार से केवल निराशा ही मिली है। रानी को 15 लाख के इलाज के लिए अब तक सरकार से केवल दो लाख रुपए की सहायता राशि जारी की गई है। रानी के पास भारत सरकार की बहुप्रचारित योजना आयुष्मान भारत का कार्ड भी है, लेकिन इस सरकारी बीमा योजना का लाभ भी उसे नहीं मिल पा रहा है। कार्ड जमा करने पर साफ कह दिया है, एप्लास्टिक एनीमिया बीमारी नहीं है। इस योजना में हमारे पास दर्ज 1400 बीमारियों से बाहर यदि कोई बीमारी आपको घेरती है तो इलाज नहीं मिल सकेगा।

11 नम्बर पर स्टाप पर अपनी माँ संतोष के साथ रहने रानी अटूट, एप्लास्टिक एनीमिया के इलाज बोन मेरो ट्रांसप्लांट कराने के लिए अरविंदो अस्पताल इंदौर में एडमिट है। जब तक ऑपरेशन के लिए जरूरी 15 लाख रुपए का इंतजाम नहीं होता, तब तक प्लेटलेट्स लगवाते रहना जीवित रहने का सहारा है। संतोष बताती हैं, प्लेटलेट्स यूनिट 12 हजार रुपए की आती है। सीएम फंड से मिले दो लाख रुपए खत्म हो गए, जनता ने जो मदद दी थी वह भी प्लेटलेट्स लगवाने में खर्च हो गई। तब मुझे किसी ने बताया आयुष्मान भारत कार्ड चालू हो गया है। मैने रानी का कार्ड 2018 में बनवा लिया था। अस्पताल में कार्ड जमा कराया लेकिन कुछ ही दिनों बाद बताया गया इसके तहत इलाज नहीं हो सकता।

सोशल मीडिया से चला रहे मुहिम
छात्रा के ऑपरेशन के लिए राजधानी में कुछ नागरिक और छात्र-छात्राएं मुहिम चला रहे हैं। इसके लिए उन्होंने राशि भी एकत्रित की है, ताकि छात्रा का ऑपरेशन न हो सके, पर अभी तक इतनी राशि एकत्रित नहीं हो सकी है कि बोर मैरो ऑपरेशन हो सके।