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न फिल्म सिटी बनी न आईटी पार्क, कैसे बढ़े रोजगार

भोपाल में रोजगार और उद्यम विकसित करने की काफी संभावनाएं हैं। यहां गोविंदपुरा के बाद कोई बड़ा व प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया। यह शहर का एक बड़ा मुद्दा है। इसपर काम करने की जरूरत है। छोटे शहरों में उद्योग आ रहे, लेकिन भोपाल में क्यों नहीं। भोपाल के लिए नए उद्योग लाने की जरूरत है।

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न फिल्म सिटी बनी न आईटी पार्क, कैसे बढ़े रोजगार
- योगेश गोयल, उद्यमी, गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोएिशन
भोपाल में रोजगार और उद्यम विकसित करने की काफी संभावनाएं हैं। यहां गोविंदपुरा के बाद कोई बड़ा व प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया। यह शहर का एक बड़ा मुद्दा है। इसपर काम करने की जरूरत है। छोटे शहरों में उद्योग आ रहे, लेकिन भोपाल में क्यों नहीं। भोपाल के लिए नए उद्योग लाने की जरूरत है।

भोपाल.
इंट्रो....शहर में रोजगार एक बड़ा मुद्दा बन गया है। फिल्मकारों का पसंदीदा शहर होने के बावजूद फिल्म सिटी बनाने में किसी की रूचि नहीं है। तमाम तरह के कॉलेज- विवि के बावजूद आइटी पार्क विकसित नहीं किया जा सका। देश और दुनिया को बड़े कलाकार देने के बावजूद ललीत कलाओं में बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण के साथ इस क्षेत्र में रोजगार देने कोई काम नहीं हुआ। स्थिति ये हैं कि भोपाल से लगे रायसेन जिले का मंडीदीप उद्योग और उद्योगपतियों को आकर्षित करता है, लेकिन भोपाल में भेल के बावजूद यहां कोई बड़ा निवेशक बीते 40 सालों में नहीं आया। चुनावी माहौल है और देश से लेकर प्रदेश व शहर तक बड़े वादे किए जा रहे, लेकिन रोजगार- उद्यम को चुनाव का मुद्दा नहीं बनाया जा रहा।

ऐसे समझे आंकड़ों में उद्यम
- 01 बड़ा औद्योगिक क्षेत्र गोविंदपुरा ही है
- 02 ही औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र है जिनमें आइटीआई और सिपेट संस्था है।
- 01 मप्र स्कूल ऑफ ड्रामा है, ये भी बड़े बच्चों के लिए। प्रायमरी से हाइसेकंडरी वालों के लिए ललीत कला सिखाने कोई सेंटर नहीं
- 04 औद्योगिक क्षेत्र है भोपाल के पास, लेकिन भोपाल में नहीं है
- 28 लाख जिले की आबादी में 40 फीसदी से अधिक युवा है जो रोजगाजार चाहते हैं
- 10 लाख से अधिक युवाओं को शहर में रोजगार की जरूरत है

मंडीदीप के भरोसे भोपाल
- भोपाल इस समय उद्यम के तौर पर पूरी तरह मंडीदीप पर निर्भर है। यहीं पर तमाम तरह के उद्यम है। लोग भोपाल में रहते हैं और सुबह मंडीदीप में काम के लिए पहुंचते हैं। मौजूदा स्थिति ये हैं कि मंडीदीप आवाजाही तक के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ता है। यानि शहर में एक तो रोजगार के अवसर नहीं है, जहां है वहां तक की पहुंच भी सुगम नहीं की जा रही है।

इनपर ध्यान देकर बना सकते हैं रोजगार-उद्यम के अवसर
- शहर में इस समय उद्योगों के लिए नई जगह की तलाश तक बंद है। खुद भेल के पास बड़ी जमीन खाली है, लेकिन न केंद्र न राज्य इसपर निर्णय ले पा रही है। सेक्टर वाइस यदि छोटे-छोटे समूह में 25 से 50 यूनिट तक उद्योगों की जगह निकाली जाए तो डेढ़ लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
- फिल्मकारों को आकर्षित करने कई बेहतर साइट्स यहां है। इन्हें इंप्रुव करें और यहां सुविधाएं विकसित करने के साथ फिल्मसिटी की प्लानिंग करें तो कलाकारों को उनके घर में ही रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
- भोपाल के कॉलेजों से हर साल 30 हजार से अधिक नए छात्र निकलते हैं। कंपनियों की जरूरत के अनुसार शिक्षण प्रशिक्षण सिलेबस तय करें तो पढ़ाई के साथ ही नौकरी पक्की हो सकती है।

इंदौर इसलिए आगे
- इस समय इंदौर पीथमपुर, मऊ, देवास और सांवेर तक फैल गया है। वास्तव में इंदौर प्रशासन ने आसपास के शहरों तक विस्तार उद्योगों के तौर पर किया। इंदौर देवास के बीच मांगलिया को विकसित कर रोजगार के नए अवसर बनाए। महाराष्ट्र से सीधे जुड़ाव का उद्योगों को लाभ मिला। भोपाल में ही भी इसी उद्यम और रोजगार की दृष्टि से सोचें तो बेहतर स्थिति हो सकती है।
इनका कहना
हमारा छोटा फेब्रिकेशन का काम है, लेकिन यहां संभावनाएं ही नहीं है। काफी कोशिश के बाद भी उद्योग नहीं बढ़ रहा।
- एसके मिश्रा, उद्यमी।
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जो शहर बिना प्लान के बढ़ रहा है उसमें रोजगार और उद्यम की बात कैसे होगी। प्लान बनाकर उद्योग व रोजगार के प्रावधान करें तो काम बढ़ेगा।
- अब्दुल मजीद, स्ट्रक्चर इंजीनियर-आर्किटेक्ट