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mp election 2023: चुनाव में नेताजी पहनेंगे एक करोड़ की फूल माला, गेंदा और गुलाब की बिक्री दोगुना तक बढ़ी

फूल के रेट भी डेढ़ गुना तक बढ़े, गुलाब और गेंदा की मालाओं की डिमांड

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चुनावी प्रत्याशियों की गाडि़यों की छत फूल-मालाओं से पटी पड़ी है तो जनसंपर्क के दौरान कभी जनता-कार्यकर्ता उन्हें माला पहना रहे हैं तो कभी नेता जनता-कार्यकर्ताओं को। नेता जहां भी जाते हैं उनके पहले फूल मालाएं पहले पहुंच जाती हैं। चुनाव सीजन में फूल-मालाओं के दाम भी 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। अकेले भोपाल में जहां 30 क्विंटल फूल की प्रतिदिन खपत होती थी, जो अब बढ़कर 50 क्विंटल तक हो गई है। वहीं, गुलाब की खपत भी 2 क्विंटल से बढ़कर 5 क्विंटल तक पहुंच गई है। फूल विक्रेताओं के अनुसार पूरे चुनावी सीजन में भोपाल और आसपास के जिलों में करीब एक करोड़ के फूलों का कारोबार होगा।

दूसरों राज्यों से सप्लाई हो रहे चुनावी फूल

फूल काराबोरी मनमोहन साहू का कहना है कि पहले अधिकांश आवक स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो जाती थी। आसपास के गांवों से फूल की आवक ज्यादा होती थी लेकिन अब चुनावी सीजन और त्योहार के चलते डिमांड बहुत बड़ गई है। ऐसे में कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से फ़ूलों की आवक हो रही है। पूरे प्रदेश में यही स्थिति है। गेंदा फूल 30 से 80 रुपए किलो तक हो गया है तो गुलाब भी 150 से 200 रुपए तक मिल रहा है। फूल की 10 से 20 रुपए में मिलने वाली सामान्य माला के भाव भी 30 से 50 तक पहुंच गए हैं। भोपाल में डेढ़ हजार चुनावी माला तक रोज बिक रही हैं।

त्योहारी ऑर्डर भी छोड़ना पड़े

फूल कारोबारी राहुल सैनी ने बताया कि भाजपा-कांग्रेस से लेकर निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशियों के कार्यालय से भी हर दिन गेंदा-गुलाब की मालाओं की डिमांड आ रही है। सबसे ज्यादा डिमांड गेंदा फूल की माला की है। पॉश कॉलोनियों से गुलाब की मालाओं की डिमांड ज्यादा है। 2 महीने पहले तक शहर और आसपास के इलाकों में 30 क्विंटल तक फूल की सप्लाई होती थी, जो अब बढ़कर 50 क्विंटल तक हो गई है। चुनावी मौसम ने शहर के फूल विक्रेताओं के चेहरे की रौनक लौटा दी है।

समर्थक अपने प्रत्याशी का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में फूलों की मालाएं ले रहे हैं। प्रत्याशियों के डोर टू डोर संपर्क से फूलों की मांग बढ़ गई है। इतने ऑर्डर के चलते हमें त्योहारी सीजन के ऑर्डर लेने से मना करना पड़ा, जबकि सामान्य समय में सभी त्योहारी सीजन पर ही निर्भर रहते हैं। फूल विक्रेताओं के अनुसार पहले एक दो सप्ताह के बाद ही गुलाब दिल्ली और मुंबई से मंगाए जाते थे लेकिन मांग बढ़ने पर सप्ताह के चौथे दिन ही गुलाब मंगवाने पड़ रहे हैं।