7 जून 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

उच्च शिक्षा में नया प्रयोग, विश्वविद्यालयों का समूह बना, एमओयू से नई शुरूआत

- विश्वविद्यालयों के समूह के राज्यपाल हैं अध्यक्ष,- विश्वविद्यालय एक दूसरे को शिक्षण कार्य सहित अन्य तकनीकी सहायता में करेंगे मदद

2 min read
Google source verification
bhopal

bhopal

भोपाल। मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालय अब एक समूह के रूप में काम करेंगे। बुधवार को राजभवन में हुई कुलपतियों की बैठक में विश्वविद्यालयों के संघ के गठन के साथ इसकी नींव पड़ गई। इसे सहायता संघ (कंसोर्टियम) भी कह सकते हैं। राज्यपाल की अध्यक्षता वाले इस कंसोर्टियम के माध्यम से विश्वविद्यालय एक दूसरे की विशेषताओं का उपयोग कर अपनी कमियों को दूर कर सकेंगे। बैठक के दौरान पांच विश्वविद्यालयों ने करार भी कर किया।

बैठक के दौरान राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालयों को काम-काज की पूरी आजादी है। विश्वविद्यालय रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करें। इसके संचालन के लिए उद्योगों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रयास करें। अनेक ऐसी योजनाएं और संस्थाएं है जिनकी परियोजनाओं के माध्यम से विश्वविद्यालय अपने आर्थिक संसाधनों को मजबूत बना सकते है।

कुलपतियों को नई सोच, ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ पहल करनी चाहिए। बैठक के दौरान विश्वविद्यालयों में मौजूद संसाधनों और आवश्यकताओं पर चर्चा हुई। तय किया कि गया विश्वविद्यालय एक दूसरे की आवश्यकताओं में सहयोग और समन्वय करेंगे।

इन विश्वविद्यालयों के बीच हुआ एमओयू -

राज्यपाल टंडन की उपस्थिति में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के साथ पांच विश्वविद्यालयों ने आपसी समझ समझौते पर हस्ताक्षर किए। डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू, छिन्दवाड़ा विश्वविद्यालय, पंडित एसएन शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल, महाराजा छत्रसाल बुन्देलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर शामिल हैं।

आरजीपीवी ने सभी विश्वविद्यालयों को उनकी आवश्यकतानुसार सॉफ्टवेयर और उनके लायसेंस उपलब्ध कराने पर सहमति दी। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल ने साइंस रिसर्च के क्षेत्र में विद्यार्थियों को सुविधाएं देने, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन ने प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व एवं पांडुलिपि संग्रहालय में रखी विभिन्न भाषाओं की लगभग बीस हजार पांडुलिपियों को शोध एवं अनुसंधान के लिये विद्यार्थियों को सुविधा देने की जानकारी दी।

किसने क्या कहा -

कांसोर्टियम की व्यवस्था से छिन्दवाड़ा विश्वविद्यालय को सर्वाधिक लाभ होगा। निर्माण की अवस्था में ही विश्वविद्यालय को अन्य विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट संसाधनों और विशेषज्ञ सेवाओं के लाभ मिल जाएंगे।
- प्रो. एम.के. श्रीवास्तव, कुलपति छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय के पास संसाधनों और विशेषज्ञों का अभाव इस व्यवस्था में दूर हो जाएगा। साधन सम्पन्न विश्वविद्यालयों की मदद से विश्वविद्यालय क्षेत्रान्तर्गत विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त होगी।

- प्रो. टीआर थापक, कुलपति छतरपुर विश्वविद्यालय

इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय एक दूसरे की मूलभूत सुविधाओं को सांझा और पारस्परिक सहयोग कर विद्यार्थियों को विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान कर सकेंगे।
- प्रो. सुनील कुमार, कुलपति राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल

कंसोर्टियम बनने से विश्वविद्यालय के आर्थिक और मानव संसाधनों की बहुत बचत होगी। विश्वविद्यालय द्वारा सर्विस प्रोवाइडर को दिये जाने वाले करोड़ों रूपयों की बचत होगी।

- प्रो. प्रदीप कुमार बिसेन, कुलपति कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर

इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय के परीक्षा संचालन, प्रवेश इत्यादि में लगने वाले वित्तीय एवं मानव संसाधन की बचत होगी। विश्वविद्यालय की दक्षता और क्षमता बेहतर होगी।
- प्रो. आशा शुक्ला, कुलपति डॉ. बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय महू