
nagar nigam bhopal
शहर में एेसे कई चौक चौराहे और मार्ग है, जिनका अब नया नामकरण हो गया है, लेकिन उन्हें नई पहचान नहीं मिल पाई है। नगर निगम ने महापुरुषों के नाम से शहर में अनेक स्थानों के नए नामकरण तो कर दिए हैं, लेकिन अब तक वह स्थान नई पहचान हांसिल नहीं कर पाए हैं।
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि इसका प्रचार प्रसार सही तरीके से नहीं हो पाया है, जिसके कारण नए नाम अब तक चलन में नहीं आ पा रहे हैं। आलम यह है कि इन स्थानों के आसपास रहने वाले लोग और दुकानदार भी इन स्थानों को नए नाम से नहीं जानते हैं। बोर्ड भी गायब हो गया किलोल पार्क चौराहे पर अजमीढ़देव की प्रतिमा की स्थापना २०१२ में की गई है।
उसके कुछ समय बाद ही इस चौराहे का नामकरण स्वर्णकार चौक के नाम से कर दिया गया था। कुछ सालों तक यहां बोर्ड भी लगा था, बाद में वह बोर्ड भी यहां से गायब हो गया। अब सिर्फ प्रतिमा के पीछे वाले हिस्से पर समाज की समिति की ओर से स्वर्णकार चौक लिखा हुआ है। आसपास के दुकानदार भी इसे इस नाम से नहीं जानते हैं। पास ही में रहने वाले मोहम्मद आमीर उल्लाह से जब इस क्षेत्र के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि इसे किलोल पार्क चौराहे, पॉलीटेक्निक रोड के नाम से जानते हैं,
जब उन्हे स्वर्णकार चौक को लेकर पूछा तब उन्हें याद आया कि इसका नामकरण हुआ है, लेकिन उनका कहना था कि यह नाम प्रचलन में नहीं आया है। दूसरी ओर पॉलीटेक्निक चौराहे पर लगे बडे संकेतक बोर्ड पर भी स्वर्णकार चौक का जिक्र नहीं है।
मार्गों के सिर्फ बोर्ड लगे हैं शहर में कई स्थानों पर मार्गों के नए नाम के केवल उस चौराहे पर बोर्ड लगे हैं, लेकिन वे चलन में नहीं आ पा रहे हैं। पिछले साल ही आरआरएल तिराहे से मिसरोद तक मार्ग का नाम युगऋषि आचार्य श्रीराम शर्मा मार्ग रखा गया था, सावरकर सेतु के पास इसका एक बोर्ड भी लगाया गया है और पट्टिका भी है, लेकिन यह चलन में नहीं आ पाया।
इसी प्रकार कुछ साल पहले ही बोर्ड ऑफिस चौराहे से न्यू मार्केट की ओर जाने वाली सडक़ का नाम महावीर मार्ग रखा है, इसका बोर्ड भी चौराहे पर लगाया गया है, लेकिन अरेरा हिल्स की ओर से आने वाले रोड और बोर्ड ऑफिस चौराहे पर लगे बड़े संकेतक बोर्ड में तीर के निशान का संकेत दिया गया है। इसी तरह रविन्द्र भवन के सामने वाला मार्ग विचित्र कुमार सिन्हा मार्ग और रोशनपुरा चौराहे से रंगमहल तक सुभाष यादव मार्ग कहलाता है। लेकिन यह भी चलन में नहीं आ पाया। एेसे आ सकता है नाम चलन में किसी क्षेत्र या स्थान के नए नामकरण के बाद उस क्षेत्र की नई पहचान बनाने के लिए बोर्ड लगाने के साथ-साथ जरुरी है कि पत्राचार से जुड़े सरकारी विभाग जैसे पोस्ट ऑफिस, बैंक, कोरियर कंपनियां सहित अन्य विभागों को भी लेटर जारी कर उस क्षेत्र में नए नाम से पत्राचार करने संबंधी सक्र्यूलर जारी किया जाए, ताकि नया नाम, मार्ग चलन में आए। इनका कहना है.़.़.़.़.़.़.़.़.़ मार्गों का नामकरण तो हुआ है, लेकिन इसे चलन में लाने के लिए प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ शहरवासियों को भी नया नाम प्रचलन मंे लाने के लिए प्रयास करना होगा। संयुक्त प्रयास से ही यह संभव है, साथ ही निगम को जगह-जगह इसके लिए बोर्ड लगाने चाहिए। संयुक्त प्रयास से ही यह संभव हो सकेगा।
प्रमोद जैन हिमांशु, जैन समाज स्वर्णकार चौक का नामकरण तो कर दिया लेकिन वह अभी तक चलन में नहीं आ पाया। पहले वहां बोर्ड लगा था, अब तो वह भी नहीं है। इसे प्रचलन में लाने के लिए निगम को प्रयास करना चाहिए, साथ ही स्थानीय लोगों को भी इसमें सहयोग करना चाहिए। राजेश वर्मा सोनी, स्वर्णकार समाज कोट्स हम लगातार कोशिश कर रहे हैं, जो नाम बदले गए, वह प्रचलन में भी आए। इसमें समय लगता है, धीरे-धीरे प्रचलित होंगे। निगम भी अपने काम काज में नए नाम का उपयोग कर रही है। आलोक शर्मा, महापौर, नगर निगम
Published on:
24 Jan 2019 11:20 am
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