
new policy for lease property
भोपाल। सरकारी एजेंसी बीडीए-एमपी हाउसिंग बोर्ड में निवेश करने वालों को प्रॉपर्टी फ्री होल्ड करवाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। मप्र भू-राजस्व संहिता 1959 के 58 साल पुराने प्रावधानों की वजह ये स्थिति बन रही है। इन प्रावधानों के तहत पुरानी प्रॉपर्टी फ्रीहोल्ड कराने के लिए बकाया लीज रेंट मय पेनल्टी चुकाना अनिवार्य है जबकि आगामी दस वर्ष का लीज रेंट चुकाना भी जरूरी है। प्रॉपर्टी की कीमत, रजिस्ट्री, टैक्स के बाद 10 साल का एडवांस लीज रेंट देकर प्रॉपर्टी को फ्रीहोल्ड कराना निवेशकों को रास नहीं आ रहा है।
वर्ष 2017 में बीडीए और हाउसिंग बोर्ड को एेसे महज 17 आवेदन मिले हैं। दोनों ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले रेवेन्यू टारगेट पूरे करने एक बार फिर अपने प्रोजेक्ट फ्रीहोल्ड करने के ऑफर्स देने शुरू कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि बीडीए-हाउसिंग बोर्ड को लीज रेंट अदा करने के बाद जिला प्रशासन कलेक्टर गाइडलाइन का एक प्रतिशत शुल्क वसूल करता है जो प्रॉपर्टी की कीमत के आधार पर तय किया जाता है।
भविष्य में फ्रीहोल्ड जमीनों पर ही निर्माण होगा। पुराने मामलों में राजस्व संहिता के नियमों का पालन करना जरूरी है।
- एसके मैहर, अपर आयुक्त, एमपी हाउसिंग बोर्ड
एेसे समझें दोहरा मापदंड
पुरानों के लिए
फ्री होल्ड एनओसी हासिल करने के लिए आवेदक को लीज रेंट की सरकारी दरों के अलावा भी दस प्रतिशत राशि अलग से जमा करानी होगी। इसे प्रोसेसिंग चार्ज का नाम दिया है। इसके अलावा पेनल्टी की राशि भी बिल में ही जुड़ेगी। इसके साथ ही एक मुश्त आगमी दस साल का लीज रेंट भी देना होगा। ३० साल पुराने लीज होल्डर्स को इतना सब करने के बाद कलेक्टर कार्यालय में मौजूदा गाइडलाइन का एक प्रतिशत अदा करना पड़ेगा।
नए मामलों में
प्रॉपर्टी फ्री होल्ड कराने वाले एक से दो साल पुराने हाउस होल्डर्स के बीच प्रॉपर्टी का एक प्रतिशत स्टांप शुल्क जमा करवाकर लीज फ्रीहोल्ड कराने का भ्रम फैला हुआ है। एजेंसियों ने स्थिति स्पष्ट की है कि एेसे मामलों में आवंटी को पहले बोर्ड के खाते में एकमुश्त १० साल का लीज रेंट जमा कराना होगा। इस पर भी 10 प्रतिशत प्रोसेस फीस ली जाएगी जिसके बाद फ्रीहोल्ड कराने के लिए उसे एनओसी मिलेगी।
Published on:
06 Jan 2018 08:50 am
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