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BMHRC : बने भर्ती नियम, पांच लाख गैस पीडि़तों को फायदा, बंद विभाग होंगे शुरू

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीएमएचआरसी में भर्ती नियम जारी कर दिए

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भोपाल। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भोपाल मेमोरियल अस्पताल की (BMHRC) सबसे पुरानी समस्या को हल कर दिया है। सरकार ने 12 फरवरी को संस्था के ग्रुप ए व ग्रुप बी के सेवाभर्ती नियम तैयार कर नोटिफिकेशन जारी करा दिया है। सरकार के इस बड़े निर्णय से जहां चिकित्सकों का पलायन रुक जाएगा, वहीं नए चिकित्सकों की भर्ती का रास्ता भी खुल जाएगा। यही नहीं इसका सबसे बड़ा फायदा राजधानी के पांच लाख से ज्यादा गैस पीडि़तों को होगा जो सालों से अस्पताल में इलाज की बाट जोह रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले भर्ती नियम ना बनने से नाराज कुछ चिकित्सकों ने अचानक अस्पताल छोड़ दिया था।

दरअसल बीएमएचआरसी में भर्ती नियमों को कर्मचारी और चिकित्सक लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। बीएमएचआरसी के केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डीएचआर के हाथों में जाने के बाद से ही भर्ती नियम बनाने के लिए दवाव बन रहा था। दरअसल अस्पताल में कोई भर्ती नियम ना होने से ना तो वेतन वृद्धी हो रही थी ना ही पदोन्नति। एेसे में एक चिकित्सक आठ-दस साल से एक ही पद पर काम कर रहे थे।

बंद हो रहे विभाग, जा रहे चिकित्सक

भर्ती नियम नहीं बनने से बीते तीन सालों में अस्पताल से दो दर्जन से ज्यादा चिकित्सकों ने अस्पताल को अलविदा कह दिया। इसका असर यह हुआ कि कई विभाग बंद हो गए और मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा था। इस दौरान इलाज नहीं मिलने से कई मरीजों की मौत भी हो गई।

मेडिकल कॉलेज का रास्ता साफ
नए भर्ती नियमों से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे बीएमएचआरसी के मेडिकल कॉलेज बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। मेडिकल कॉलेज बनने से यहां 300 बिस्तरों का नया जनरल अस्पताल भी तैयार होगा। इसके साथ ही मेडिकल स्टूडेंट्स के रूप में संस्थान को जेआर और एसआर भी मिल जाएंगे।

एम्स से कम सैलरी
नए नियम से चिकित्सकों के वेतन में इजाफा तो होगा, लेकिन एम्स के मुकाबले कहीं कम है। बीएमएचआरसी के चिकित्सकों का कहना है कि नए रूल्स में प्रोफेसर्स के लिए जो ग्रेड पे दिया गया है वो एम्स के असि. प्रोफेसर से भी कम है। गौरतलब है कि बीएमएचाआरसी के नए भर्ती नियम राममनोहर लोहिया और सफदरजंग जैसे केन्द्र शासित अस्पतालों के आधार पर बनाया है।

यह होगा फायदा
- नए चिकित्सकों की भर्ती आसान हो जाएगी

- डॉक्टरों की कमी दूर होगी

- सालों से बंद पड़े विभाग फिर शुरू हो जाएंगे
- लंबे समय से काम कर रहे चिकित्सकों के प्रमोशन होंगे

- मेडिकल कॉलेज बनने से अन्य विभाग भी शुरू होंगे
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इन विभागों में है ज्यादा दिक्क्त
नेफ्रोलॉजी, गेस्ट्रोमेडिसिन, गेस्ट्रो सर्जरी, एंडोक्रॉयोलॉजी, न्यूरो मेडिसिन, न्यूरो सर्जरी, कार्डियक सर्जरी

इनका कहना

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद केन्द्र सरकार ने यह अहम फैसला लिया है। नियम का लागू होना संस्था के चिकित्सकों की एक बड़ी जीत है। इसका सीधा फायदा गैस पीडि़तों को मिलेगा।
- अब्दुल जब्बार, सामाजिक कार्यकर्ता

आंकड़े
750 बिस्तर संख्या

18 विभाग
05 बंद पड़े

700 मरीज रोत आते हैं

यह है नया वेतनमान
डायरेक्टर - 1.44 लाख से 2.18 लाख

प्रोफेसर - 1.23 लाख से 2.15 लाख
एसो. प्रोफेसर - .78 लाख से 2.09 लाख

असि. प्रोफेसर - .68 लाख से 2.08 लाख