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ये कैसा नियम : शीशे पर काली फिल्म लगाने पर कार मालिकों का जुर्माना, प्रायवेट बस ऑपरेटरों को छूट

दिल्ली में हुए निर्भया केस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लगा दिया था पूर्ण प्रतिबंध यात्रियों की सुविधा के नाम पर काली फिल्म और परदों से बंद रहती हैं यात्री गाडि़यों की खिड़कियां

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भोपाल। यदि आप अपनी कार पर काली फिल्म लगाकर शहर में घूमेंगे तो संभव है किसी न किसी चौराहे पर आपका चालान कट जाए लेकिन प्रायवेट बस ऑपरेटरों को सरकार ने छूट दे रखी है। परिवहन विभाग की मेहरबानी का फायदा उठाकर बस ऑपरेटर धड़ल्ले से यात्री बसों की खिड़कियों को काली फिल्म और परदों से बंद कर वाहनों को दौड़ाते हैं।

महिलाओं की सुरक्षा का इंतजाम नहीं

परिवहन नियमों के मुताबिक गांव और मझौले शहरों की ओर जाने वाली प्रायवेट बसों के अंदर का नजारा देखकर महिला सुरक्षा कानून पर हंसी आ जाएगी। यहां ठसाठस भरी बस में महिलाओं को पुरुषों से सटकर बैठना पड़ता है। चलती बस में कई बार महिलाएं इस मजबूरी में गंभीर छेड़छाड़ का शिकार हो जाती हैं लेकिन सुनवाई नहीं होने के भय से चुपचाप सबकुछ सहने के लिए मजबूर हो जाती हैं।

काली फिल्म लगी बसों के संचालन पर पूरी तरह से रोक है। हर जिले में इसके लिए फ्लाइंग स्क्वॉड गठित की गई है। यातयात पुलिस के साथ मिलकर प्रतिमाह अभियान चलाया जाता है। - संजय सोनी, उपायुक्त, परिवहन


नियम विरुद्ध बसों का संचालन करने वाले ऑपरेटर संगठन में शामिल नहीं हैं। वैधानिक तरीके से बसों का संचालन करने वाले सभी नियमों के तहत व्यापार करते हैं। - गोविंद शर्मा, अध्यक्ष, बस ऑपरेटर एसोसिएशन