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भोपाल से 50 किमी दूर टाइगर सफारी 25 किमी दूर विलेज टूरिज्म के नजारे

बंसत में राजधानी और आसपास का मौसम बहुत सुहाना हो गया है। भोपाल के 50 किमी के आसपास में कई ऐसे स्थल हैं जहां वीकेंड आउटिंग पर जाया जा सकता है। यहां न केवल प्राकृतिक नजारे देखने को मिलेंगे बल्कि खेत-खलिहान और उद्यान को भी नजदीक से निहारा जा सकता है।

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Ratapani

भोपाल.बंसत में राजधानी और आसपास का मौसम बहुत सुहाना हो गया है। भोपाल ेके 50 किमी के आसपास में कई ऐसे स्थल हैं जहां वीकेंड आउटिंग पर जाया जा सकता है। यहां न केवल प्राकृतिक नजारे देखने को मिलेंगे बल्कि खेत-खलिहान और उद्यान को भी नजदीक से निहारा जा सकता है।
राजधानी से 25 किमी दूर कठोतिया
भोपाल से 25 किमी दूर कठोतिया है। सरकार इसको ईको टूरिज्म स्पॉट के रूप में विकसित कर रही है। ग्लोबल सस्टेनेबल टूरिज्म काउंसिल यहां समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। कठोतिया में जंगल के बीच पत्थर, बांस और मिट्टी के बने स्ट्रक्चर्स में पर्यटक गांव और जंगल का लुत्फ उठा सकते हैं। इको टूरिज्म के साथ पर्यटक यहां आदिवासी कला,संस्कृति और स्थानीय खानपान का मजा ले सकते हैं।
रातापानी में पुरातत्व और विलेज टूरिज्म का संगम
्ररातापानी की दूरी भोपाल से करीब 50 किमी दूर है। यहां पुरातत्व, विलेज टूरिज्म और जंगल सफारी की त्रिवेणी देखा जा सकता है। यहां झिरी और देलाबाड़ी में जंगल सफारी की सुविधा है। इसके अलावा झिरी से केरवा, खरी, समसगढ़ वाया कठोतिया के लिए अलग सफारी तैयार की जा रही है। रातापानी सेंचुरी के जंगलों में 900 साल पुराने परमारकालीन मंदिरों के अवशेष मिले हैं। ये बाड़ी तहसील के नीलबड़ गांव से 4 किमी दूर हैं। जबकि ग्यासपुर में 13वीं शताब्दी के सूर्य मंदिर मिले हैं। इसे यहां बाजरा मठ के नाम से जानते हैं।
तेजी से विकसित हो रहा हार्टी टूरिज्म
भोपाल के आसपास के ग्रामीण इलाकों में कई औद्यानिकी यानी हार्टी टूरिज्म तेजी के साथ विकसित हो रहे हैं। यहां पारंपरिक खेती के साथ फल-फूल और सब्जियों की खेती हो रही है। विदेशों से लाए फल उगाए जा रहे हैं। इन फार्म हाउसों के बीच अत्याधुनिक हट बनी हैं, जहां रात में भी रुकने की सुविधा है। पाली हाउस, होम स्टे और अत्याधुनिक फल-फूलों की खेती को एक साथ देखा जा सकता है।