
भोपाल। वक्त कितनी तेजी से बदल रहा है इसका अंदाजा हम कई उदाहरणों से लगा सकते हैं। लेकिन अब समाज को गौरवान्वित करने वाली ऐसी मिसाल भी दी जा सकती हैं कि बेटियों को बोझ समझने वाला दौर अब जा चुका है, अब बहुओं के घर आते ही उन्हें सास-ससुर और परिजन बेटी को जन्म देने का आशीर्वाद दे रहे हैं। हालांकि दुख यह भी है कि आज भी कई नवजात मासूम कचरे के डिब्बों, झाड़ियों में पड़ी मिल जाती हैं, लेकिन इससे इतर जश्न मनाने की वजह सिर्फ यह नहीं रही कि बेटी ने नाम रोशन किया है, वो फौज में है, बड़ी एक्ट्रेस है, बड़ी ऑफिसर है या फिर कुछ और...।
बल्कि अब बेटियों के जन्म लेते ही कई परिवारों में उत्साह और उत्सव का जश्न मनाया जाने लगा है। ढोल-नगाड़ों और शहनाइयों की गूंज अब बेटी की शादी में ही नहीं बल्कि, उसके जन्म पर भी सुनाई दे रही है। परिवार ग्रेंड वेलकम पार्टियों का आयोजन कर रहे हैं। मप्र में ऐसे एक दो नहीं बल्कि कई परिवार हैं, जिनके घर बेटियों के जन्म लेते ही खुशियों की शहनाइयों से गूंज उठे। पत्रिका.कॉम ने ऐसे कुछ परिवारों से बात की, जिन्होंने बेटियों के जन्म को उत्सव की तरह मनाया...
जबलपुर की वर्मा फैमिली बनी मिसाल
हाल ही में जबलपुर की वर्मा फैमिली में जब बेटी का जन्म हुआ, तो परिवार का हर सदस्य खुशियों के गीत गाता नजर आया। दादा-दादी हों या नाना-नानी, या फिर परिवार का हर छोटा-बड़ा सदस्य खुशियों में सराबोर था। बड़ी धूमधाम से बहू और पोती का स्वागत किया गया। वहीं माता-पिता की खुशी तो देखते बनती थी। हर किसी के चेहरे पर बिखरी रौनक रह-रह कर कह रही थी आज मंगल गाओ, नजर उतारो मेरे घर लक्ष्मी आई है।
ईशा वर्मा कहती हैं कि हमारे परिवार में कई साल बाद बेटी का जन्म हुआ है। इससे पहले परिवार में सभी बेटे ही थे। इसीलिए घर में मम्मी-पापा के साथ ही सभी को बेटी होने का ही इंतजार था। यहां तक कि बेटी हो इसके लिए सभी भगवान से प्रार्थना कर रहे थे। वहीं उन्होंने और उनके हजबैंड ने बेटी होने के लिए जबलपुर में मान्यता भी मानी थी। जैसे ही मन्नत पूरी हुई पूरा परिवार जबलपुर में मान्यता उतारने पहुंच गया। दादी का कहना है कि हम खुशनसीब हैं कि भगवान ने हमारी सुनी और हमारे घर में बेटी का जन्म हुआ। साक्षात लक्ष्मी हमारे घर पधारी हैं।
ऐसे किया स्वागत
जैसे ही ईशा अपनी बेटी के साथ अस्पताल से घर लौंटी, तो घर के दरवाजे पर उनका स्वागत ढोल-नगाड़ों के साथ किया गया। दीवाली के जश्न की तरह बम पटाखे फोड़कर परिवार के सदस्यों ने अपनी खुशी का इजहा किया। वहीं घर में प्रवेश करते ही ईशा और उनके पति अभिनव वर्मा ने केक काटकर परिवार के साथ खुशियों के पल बिताए। सब उसे प्यार से शिवि कहकर बुलाने लगे और ऑरिजनल नाम अविशा रखा गया। ईशा बताती हैं कि घर वालों ने प्रेगनेंसी के समय ही बेटी का नाम सोच लिया था। अविशा नाम ईशा और उनके पति अभिनव के नाम के कॉम्बिेनेशन से रखा गया है।
जैसे ही हम सभी को पता चला कि बेटी का जन्म हुआ है, तो घर-परिवार का हर सदस्य खुश था। सब कह रहे थे कि भगवान ने सुन ली। सबकी दिली तमन्ना पूरी हुई। जिस तरह एक बेटे के आने पर बड़े आयोजन किए जाते हैं हमारे परिवार में हमारी बेटी के आने पर उससे भी ग्रेंड वेलकम पार्टी का आयोजन किया गया। हर नाते-रिश्तेदार खुशी का इजहार करता रहा।
- ईशा वर्मा और अभिनव वर्मा
हरदा का राठौर परिवार
हरदा के एक परिवार को जैसे ही पता चला कि उनके घर आंगन में भी अब बेटी खेलने वाली है, तो उसके स्वागत की जोरदार तैयारियां शुरू हो गईं। ऐसा ग्रेंड वेलकम किया गया कि लोग देखते रह गए। अस्पताल से घर लौटने के रास्ते में मां की गोद में बच्ची जिस-जिस रास्ते से गुजरी वहां फूलों की चादर बिछा दी गई। पिता नीलेश राठौर और मां रानू राठौर की खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था। बच्ची की दादी अपने हाथों से सजावट करती नजर आईं, तो बम-पटाखों के धूम-धड़ाके के बीच इनका स्वागत किया गया। राठौर के परिवार में खुशी मनाने वाला यह परिवार खुद ही नहीं था, बल्कि इनके पड़ौसी भी इनकी खुशी में शामिल हुए।
मां लक्ष्मी का स्वरूप मानकर छापे कुमकुम के पद चिह्न
बेटी के घर आते ही परिजनों ने सबसे पहले उसके पैरों में कुमकुम लगाया और एक सफेद कोरे कपड़े पर उसके पद चिह्न लिए। मां लक्ष्मी का रूप मानकर इन पदचिन्हों को पिता नीलेश ने माथे पर लगाया। फिर घर में प्रवेश किया। घर की दरो-दीवार गुब्बारों से सजे थे। बच्ची का ऐसा जोश और उत्साह से स्वागत किया गया कि जानें कौन सा उत्सव मना रहे हों।
बेटी के आते ही घर में चारों ओर खुशियां छा गईं। बच्ची की मां रानू राठौर ने समाज को एक अनोखा संदेश दिया है। तो रानू ने कहा कि बेटियां कल का भविष्य हैं। बेटियों को खूब पढ़ाना चाहिए। जबकि, पिता नीलेश ने कहा कि हमारे लिए बेटे-बेटी में कोई भेद नहीं माना जाता। बेटा होता तो भी एक ही बात होती।
मंदिर-मंदिर मांगी मन्नत
बच्ची की दादी ने कहा कि मैं तो पहले ही चाहती थी कि घर में बेटी का जन्म हो। इसके लिए उन्होंने मंदिर-मंदिर जाकर मन्नत मांगी है। उन्होंने कहा कि समाज में बेटे-बेटी को एक ही स्थान मिलना चाहिए। दोनों में कोई फर्क नहीं करना चाहिए। बता दें, बच्ची के पिता हरदा में फोटो फ्रेमिंग का काम करते हैं।
भोपाल के इस परिवार में भी बेटी के जन्म पर खुशी से आंखें हुईं नम
राजधानी भोपाल में भी ऐसे मामलों की कमी नहीं है। यहां एक मुस्लिम परिवार में भी जैसे ही बेटी का जन्म हुआ तो हर कोई अल्लाह का शुक्र कहता हुआ नजर आया। परिवार के बच्चे खुशी से उछलने-कूदने लगे। बेटी के पिता फारुक रजा ने बताया कि पहले से ही उनके दो बेटे हैं, लेकिन उन्हें बेटी की ख्वाहिश थी। वहीं घर-परिवार वालों ने प्रेगनेंसी के दौरान ही बेटी के आगमन की तैयारियां शुरू कर दी थीं। नवजात बेटी के लिए दादी और मां ने अपने हाथों से सुंदर-सुंदर फ्राक बनाईं, तो कई खूबसूरत ड्रेसेज तैयार कीं। वहीं जैसे ही पता चला कि बेटी हुई है, तो परिवार के सदस्यों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
वहीं मां सायरा का कहना है कि मेरा पूरा परिवार बेटी के इंतजार में था। अल्लाह ने हमारी ख्वाहिश पूरी की इसके लिए हम उसके शुक्रगुजार हैं। एहसानमंद हैं कि उसने हमें प्यारी सी खूबसूरत सी बेटी दी। सना का कहना था कि परिवार ने बर्थ से पहले से ही उसके कपड़े तैयार कर लिए थे, वहीं नाम भी सोच लिया था। हमने हमारी बेटी का नाम जिशान रखा है।
नोटः इन सभी परिवारों के सदस्यों का कहना है कि अब जमाना बदल गया है। अगर आज बेटियों के जन्म पर खुशी नहीं मनाई तो फिर कब मनाएंगे। जो लोग आज भी बेटियों से खुश नहीं हैं उन्हें अब समझना चाहिएं, घर परिवार की रौनक बेटियों से है, बहुओं से है।
Updated on:
22 Jun 2023 04:03 pm
Published on:
22 Jun 2023 03:51 pm
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