
मप्र में पांच साल में बाल लिंगानुपात में सिर्फ 13 अंकों का सुधार, एक हजार बालकों पर 939 बालिकाओं का जन्म,मप्र में पांच साल में बाल लिंगानुपात में सिर्फ 13 अंकों का सुधार, एक हजार बालकों पर 939 बालिकाओं का जन्म,मप्र में पांच साल में बाल लिंगानुपात में सिर्फ 13 अंकों का सुधार, एक हजार बालकों पर 939 बालिकाओं का जन्म
भोपाल. शासन की तमाम योजनाओं के बावजूद देश और खासतौर से मप्र में बाल लिंगानुपात बेहतर नहीं हो सका है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआइएस) की रिपोर्ट पर नजर दौड़ाएं तो मप्र में वर्ष 2014-15 से 2020-21 के बीच बाल लिंगानुपात में सिर्फ 13 अंकों का ही सुधार आया है। वर्ष 2014-15 में प्रत्येक एक हजार बालकों पर 926 बालिकाएं जन्म लेती थीं, वहीं वर्ष 2020-21 में ये आंकड़ा 939 तक ही पहुंच पाया। हालांकि कई ऐसे भी राज्य हैं जहां पांच साल के दौरान बाल लिंगानुपात और भी खराब हुआ है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में 31 अंकों का तो राजस्थान में 15 अंकों का सुधार हुआ है। बता दें, देशभर में इसमें 19 अंकों के सुधार का दावा है और वर्तमान प्रत्येक एक हजार बालकों पर 937 बच्चियों का जन्म हुआ है। मालूम हो कि गैरकानूनी तरीके से गर्भ में ***** का पता लगाने के साथ ही कन्या भू्रण हत्या के चलते प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में लडक़े-लड़कियों के के जन्म दर में अंतर है।
मप्र के 42 जिले और क्षेत्र योजना में है शामिल
केंद्र सरकार की बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ योजना में देशभर के 405 जिलों को शामिल किया गया है। इन जिलों और क्षेत्रों को नीति आयोग द्वारा चिह्नित किया गया। इस योजना में सबसे अधिक 68 जिले उप्र से तो इसके बाद 42 जिले मप्र के हैं। इनमें मुरैना, ग्वालियर, भिण्ड, दतिया, रीवा, टीकमगढ़, शिवपुरी, श्योपुर, छतरपुर, इंदौर, सतना, गुना, नरसिंहपुर, सीहोर, सीधी, पन्ना, देवास, होशंगाबाद, राजगढ़, शाजापुर, भोपाल, अशोकनगर, सिंगरौली, जबलपुर, बुरहानपुर, सागर, विदिशा, मंदसौर, नीमच, धार, दमोह, उज्जैन, पूवी निमाड़, पश्चिमी निमाड़, रतलाम, कटनी, झाबुआ, उमरिया, बड़वानी, सिवनी, अनूपपुर शामिल हैं।
छह साल में मप्र को केंद्र से मिले 37.94 करोड़
घटते बाल लिंगानुपात, बालिकाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र से मप्र सरकार को वर्ष 2015-16 से वर्ष 2020-21 तक कुल 37.94 करोड़ रुपए मिले हैं। हालांकि वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक इसमें से 13.07 करोड़ रुपए ही खर्च हो सके। वर्ष 2020-21 में ही 11.11 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए।
जन्म के समय लिंगानुपात में टॉप 20 राज्य
राज्य ---------वर्ष 2014-2015----वर्ष 2020-21
पुंडूचेरी----------916---------985
मिजोरम--------971--------- 962
अंडमान निकोबार---967------961
छत्तीसगढ़------930-------961
केरल-------959--------958
मणिपुर------933-------954
आंध्रपदेश---921-----952
लक्ष्यद्वीप----1000-----948
तमिलनाडू-----917------948
राजस्थान----929-------946
पश्चिम बंगाल---942----949
गोवा-----939------949
हिमाचल प्रदेश---897----944
त्रिपुरा------958------944
असम-----920-----944
चंडीगढ़---874------941
उत्तराखंड----903------940
महाराष्ट्र-----920------940
मध्यप्रदेश---926------939
ओडिशा----948------936
(स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक )
Published on:
06 Mar 2022 01:03 am
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