
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के 26 मंदिरों सहित प्रदेश के अन्य जिलों के एतिहासिक महत्व के प्राचीन मंदिरों और देव स्थानों का जीर्णोद्धार अब राज्य सरकार खुद नहीं करेगी, बल्कि यह काम स्वयंसेवी संस्था इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज(इंटेक) के जरिए आउटसोर्सिंग से कराया जाएगा।
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए है। राज्य में हर सरकारी मरम्मत और रखरखाव के काम के लिए राज्य सरकार टेंडर जारी करती है। इस प्रतिस्पर्धा में आने वाली संस्थाओं में से न्यूनतम दर और राज्य सरकार की एजेंसियों के तय मापदंडों पर काम करने वाली संस्थाओं को काम दिया जाता है लेकिन इस एनजीओ को काम देने के लिए राज्य सरकारने इसे टेंडर प्रक्रिया से भी छूट दे दी है।
लोक निर्माण विभाग मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए इंटेक को कार्य की एजेंसी बनाएगा और इस संस्था से निर्माण कराएगा। इंटेक भी यह काम आउटसोर्सिंग के जरिए कराएगा। इस काम के लिए इंटेक को राज्य सरकार नौ प्रतिशत पर्यवेक्षण शुल्क भी प्रदान करेगी। यह शुल्क मंदिर, देवस्थानों की मरम्मत और रखरखाव पर आने वाले मूल खर्च के अलावा होगा। विभाग समय-समय पर जिन स्थानों के जीर्णोद्धार का निर्णय लेगा उनका विवरण इंटेक को भेजा जाएगा।
यहां इतने हैं मंदिर : उज्जैन-2572,देवास-867,रतलाम-1780, शाजापुर-976 आगर मालवा-737, मंदसौर-2306, नीमच-1445, इंदौर-1439, धार-1118, खरगौन-147, बड़वानी-44, झाबुआ-190, मुरैना-866, श्योपुर-624, भिंड-10, रीवा-96, शहडोल-26, दमोह-514, पन्ना-134, टीकमगढ़-610, भोपाल-26, रायसेन-377, राजगढ़-741, विदिशा-104, बैतूल-103, जबलपुर-62, छिंदवाड़ा-49, मंडला-34, बालाघाट-50, गुना-688, शिवपुरी-34, अशोकनगर-131, ग्वालियर-987
इधर, तहसीलदार को सस्पेंड करने के बाद दे दिया अभयदान :-
राजस्व विभाग के अफसरों ने सरकार द्वारा कामकाज में लापरवाही के मामले में उल्टा टांगने के बयान के मामले में नया मोड़ आ गया है। राजस्व अफसरों ने एकजुट होकर सरकार को मैसेज दिया है कि अगर उनके विरुद्ध कार्रवाई हुई तो अब आने वाले दिनों में बैठकों का बहिष्कार किया जाएगा।
इन्होंने सरकार से कहा है कि वे स्टाफ की कमी के बावजूद काम में किसी तरह की कोताही नहीं बरत रहे हैं पर इसके बाद भी किसी भी तरह की सजा दी तो राजस्व विभाग के अफसर विरोध पर उतर जाएंगे। इस धमकी का असर भी देखने को मिला। मुख्य सचिव ने भोपाल संभाग की समीक्षा के दौरान एक नायब तहसीलदार को सस्पेंड करने के बाद उसे अभयदान दे दिया।
भोपाल संभाग की समीक्षा बैठक के पहले राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जिस तरह से जिलों के राजस्व न्यायालयों की जांच पड़ताल का काम शुरू किया, उससे माना जा रहा था कि शुक्रवार की समीक्षा बैठक में कम से कम आधा दर्जन अधिकारियों पर गाज गिरेगी। भोपाल जिले के अफसर निशाने पर थे।
इंदौर की टीम आने के बाद बदला माहौल : वहीं सूत्रों का कहना है कि भोपाल के रिकार्ड की जांच के लिए इंदौर के अधिकारियों को बुलाया था जहां के अफसर पिछले माह अपने जिले की किरकिरी होने से दुखी थे। यहां दस्तावेजों की जांच भोपाल की टीम ने की थी और भारी गड़बड़ी सामने आई थी। इंदौर के अफसर भोपाल में एक-एक दस्तावेज खंगाल रहे थे, उससे साफ हो गया कि सरकार कार्रवाई के लिए ऐसी जांच करा रही है। यह मैसेज भी गया कि भोपाल के अफसरों पर कार्रवाई कर सरकार प्रदेश में संदेश देना चाहती है। इसे भांपते हुए मप्र राजस्व निरीक्षक संघ, राजस्व अधिकारी संघ और राज्य प्रशासनिक सेवा संघ के अफसरों ने एकजुटता दिखा सरकार को मैसेज करा दिया कि अगर इतनी मेहनत के बाद भी किसी पर कार्रवाई की गई तो सीएस और प्रमुख सचिव द्वारा ली जाने वाली बैठक का बहिष्कार कर दिया जाएगा।
Published on:
07 Oct 2017 05:10 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
