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10 से अधिक पशु हैं, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति जरूरी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने डेयरियों का प्रबंधन तय गाइडलाइन और नियमों के अनुसार करने के निर्देश नगर निगम और एमपीपीसीबी को दिए हैं।

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10 से अधिक पशु हैं, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति जरूरी

10 से अधिक पशु हैं, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति जरूरी

भोपाल. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने डेयरियों का प्रबंधन तय गाइडलाइन और नियमों के अनुसार करने के निर्देश नगर निगम और एमपीपीसीबी को दिए हैं। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने वर्ष 2015 में लगी सुशील शर्मा की याचिका पर बुधवार को अंतिम आदेश जारी किया। आदेश में गाइडलाइन के अनुसार 10 से ज्यादा पशु वाली गौशालाओं और डेयरियों को वायु और जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कंसेंट या अनुमति अनिवार्य है। एमपीपीसीबी को निर्देशित किया है कि जो डेयरियां अनुपचारित पानी जलस्रोतों या खुले में बहा रही हैं उसकी जांच की जाए। गड़बड़ी पर पीसीबी कार्रवाई कर सकता है। एनजीटी ने डेयरियों की शिफ्टिंग के बारे में कहा है कि ट्रिब्यूनल द्वारा पहले जारी की गई गाइडलाइन का पालन किया जाए।

4 साल में शिफ्टिंग नहीं

एनजीटी ने वर्ष 2017 में सभी डेयरियों को राजधानी के बाहर शिफ्ट करने का आदेश दिया था। नगर निगम द्वारा पेश जवाब में बताया गया था कि शहर में 765 डेयरियां चल रही हैं। एनजीटी द्वारा लगातार पूछताछ के बाद नगर निगम ने परवलिया, अरवलिया, कालापानी, ग्राम दीपड़ी, तूमड़ा, मुगालिया कोट और फतेहपुर डोबरा में शिफ्टिंग के लिए जगह चिन्हित की थी। लेकिन अभी तक यह शिफ्टिंग नहीं हो पाई है।

सीपीसीबी की गाइडलाइन
डेयरी फार्म व गौशाला शहर व गांव की सीमा से दूर हो। आवासीय क्षेत्र, स्कूल और अस्पताल से कम से कम 100 मीटर दूर होना चाहिए।
डेयरी व गौशाला नदी, तालाब या जलस्रोतों के वेटलैंड से 200 मीटर दूर हो। पास में ढाई मीटर एरिया में ग्रीनबेल्ट होना चाहिए।
डेयरियों से अनट्रीटेड वेस्ट बाहर न निकले, ये नालों, नदियों या सीवेज लाइन में न डालें।
गोबर को कंपोस्टिंग, वर्मी कंपोस्टिंग, बायोगैस, गौकाष्ठ में उपयोग करना चाहिए।
डेयरी संचालक गोबर निश्चित अंतराल पर नियमित रूप से साफ करें, डेयरी परिसर और आसपास प्रतिदिन सेनीटाइज्ड करें और चूना डालें।
वेस्ट पानी ट्रीट करके ही बाहर निकालें। व्यक्तिगत या सामूहिक ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करें।
यहां का पानी भूजल को दूषित नहीं करे। इसके लिए डेयरियों के शेड में प्रॉपर फ्लोरिंग के साथ वेस्ट वाटर कलेक्शन सिस्टम होना चाहिए। पशुओं की सुरक्षा के लिए फर्श चिकना भी नहीं होना चाहिए।