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केरवा-कलियासोत डैम में पीएस पर्यावरण की समिति को एक भी अतिक्रमण नहीं मिला था, सीएस की कमेटी ने खोज निकाले 129 अतिक्रमण

एनजीटी के समक्ष मुख्य सचिव ने पेश की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट, शासन की तरफ से की गई पांच लाख की पेनाल्टी वापिस लेने की अपील, पहले और अभी की रिपोर्ट में भारी विरोधाभास

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भोपाल

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Sunil Mishra

Sep 21, 2023

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भोपाल का कलियासोत डैम

भोपाल. केरवा और कलियासोत डैम के मामले में बुधवार को एनजीटी की सुनवाई में मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस ने उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट पेश की। सुनवाई के दौरान पिछली सुनवाई में शासन पर लगाई गई पांच लाख की कॉस्ट को वापिस लेने के लिए भी अर्जी लगाई गई है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कलियासोत जलाशय में 96 और केरवा जलाशय के दायरे में 33 और कुल 129 अतिक्रमण पाए गए हैं। इनमें से अधिकांश सरकारी जमीन पर है। जबकि इसके पहले प्रमुख सचिव पर्यावरण द्वारा गठित जिला स्तरीय समिति ने सौंपी रिपोर्ट में बताया था कि कलियासोत जलाशय के डूब क्षेत्र में कोई अतिक्रमण नहीं पाया गया। इससे शासकीय अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सेंट्रल जोन बेंच ने बुधवार को डॉ सुभाष सी पांडे और राशिद नूर खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। इसमें ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव नगरीय विकास भी वर्चुअली पेश हुए और जवाब दिया। शासन की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया कि इसके पहले सरकारी वकील की लापरवाही के कारण पिछली सुनवाई में जवाब पेश नहीं किया जा सका। उन्होंने विभिन्न विभागों को समय पर सूचित नहीं किया था। उनका इस्तीफा हो चुका है। इसके साथ नगर निगम और एमपीपीसीबी के ओआइसी के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। इसलिए अब सीएस के माध्यम से मप्र शासन पर लगाई गई पांच लाख रूपए की कॉस्ट को वापिस लिया जाए। इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह कॉस्ट शासन के एटीट्यूड, आदेश की उपेक्षा के कारण लगाई गई थी इसलिए इसे वापिस लेने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि अभी एनजीटी ने इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया है।

दोनों समितियों की रिपोर्ट में विरोधाभास

पहली समिति को नहीं मिला था कोई अतिक्रमण
पर्यावरण के प्रमुख सचिव द्वारा नवंबर 2022 में पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया था कि टीटी नगर राजस्व वृत्त और हुजूर तहसील की टीमों ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में केरवा और कलियासोत डैम का सीमांकन किया लेकिन इनके एफटीएल में कहीं भी अवैध निर्माण या अतिक्रमण नहीं पाया गया । तहसीलदार हुजूर ने बताया था कि ग्राम महुआखेड़ा की केरवा जलाशय के लिए अधिग्रहित जमीन पर एफटीएल से करीब 30 मीटर दूरी पर 39 झुग्गियां बनी हुई हैं। यह सरोतीपुरा मोहल्ला के नाम से जाना जाता है और यहां लोग रह रहे हैं। यहां एक स्कूल भी बना है। लेकिन जलाशय के डूब क्षेत्र में कोई निर्माण नहीं है।

सीएस की समिति को मिल गए 129 अतिक्रमण

सीएस की समिति ने बताया है कि कलियासोत जलाशय में 96 अतिक्रमण मिले। इनमें से 84 सरकारी जमीन पर और 12 प्राइवेट जमीन पर हैं। इनमें 58 घर और 7 मंदिर हैं। केरवा जलाशय के दायरे में 33 अतिक्रमण पाए गए हैं। इनमें से 18 सरकारी जमीन पर और 15 प्राइवेट जमीन पर हैं। एक सैटेलाइट स्कूल और एक बिजली सब स्टेशन भी केरवा के बफर जोन में है।