
भोपाल। मध्यप्रदेश के मांडू में बनी फिल्म 'रानी रूपमती' को आज भी लोग नहीं भूले हैं। इसकी हीरोइन को बॉलीवुड में पहचान मिली और स्टार बना दिया। इस अभिनेत्री का नाम था निरुपा राय। यह अभिनेत्री आगे चलकर सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की ऑनस्क्रीन मां कहलाने लगीं।
patrika.com फिल्म अभिनेत्री निरुपा राय के जन्म दिन के मौके पर बताने जा रहा है दिलचस्प किस्से, जिसे आज भी लोग याद करते हैं...।
मांडू की रानी रूपमती को नहीं भूलते
ऐतिहासिक नगरी मांडू के बाज बहादुर और रानी रूपमती की प्रेम कहानी पर आधारित इस फिल्म ने कई रिकार्ड तोड़ दिए। यह फिल्म सन 1957 में बनी थी। इसी से निरुपा राय को एक अलग पहचान मिली थी।
आज भी गुनगुनाते हैं यह गाना
मध्य प्रदेश का एक ऐसा पर्यटन स्थल है माण्डू, जो रानी रूपमती और बादशाह बाज बहादुर के अमर प्रेम का साक्षी बना है। यहां आज भी उनकी प्रेम गाथाओं के किस्से सुनाए जाते हैं। फिल्म रानी रूपमति का गीत भी रोज ही यहां आने वाले पर्यटकों को सुनाया जाता है। आ लौट के आजा मेरे मीत...। इसके गाने आज भी लोगों को सुकून देते हैं। सबसे ज्यादा चर्चित गाना आ अब लौट के आजा मेरे मीत काफी चर्चित रहा और लोगों ने सुकून का अहसास किया।
बाज बहादुर ने बनवाया था खास महल
इस फिल्म में रानी रूपमती और बाजबहादुर के प्रेम की कहानी बताई गई थी। इतिहासकारों के अनुसार रानी रूपमती को बाज बहादुर इतना प्यार करते थे कि रानी उनके बिना कुछ कहे ही वो उनके दिल की बात समझ जाया करते थे। बाज बहादुर और रानी रूपमती के प्यार का साक्षी 3500 फीट की ऊंचाई पर बना रानी रुपमती का महल है। कहा जाता है कि रानी नर्मदा नदी का दर्शन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करती थी। रानी की इसी इच्छा को पूरा करने के लिए बाज बहादुर ने एक मंडप का निर्माण कराया था, जिसे लोग रानी रूपमती के महल के नाम से जानते हैं। रानी यहां से 100 किलोमीटर दूर बहती नर्मदा नदी का दर्शन करती थी।
बाद में बन गई बिग-बी की फिल्मी मां
निरुपा राय का उनका मूल नाम कोकिला बेन था। 1961 में छाया में उन्होंने माँ की भूमिका निभाई। उन्होंने आशा पारेख की माँ की भूमिका निभाई थीं। इस फिल्म में उन्हें मां के किरदार के लिए सराहना मिली। उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड से भी नवाजा गया। 1975 में आई फिल्म दीवार निरुपा राय की सर्वश्रेष्ठ फिल्म बन गई, साथ ही बिग बी के लिए भी मील का पत्थर साबित हुई। निरुपा राय ने शशि कपूर और अमिताभ बच्चन की माँ की भूमिका निभाई थी। फिल्मों में अमिताभ बच्चन मां बनने का सिलसिला यहां से शुरू हो गया था। इसके बाद खून पसीना, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथॉनी, सुहाग, इंकलाब, गंगा जमुना सरस्वती गिरफ्तार, मर्द जैसी फिल्मों में अमिताभ की मां का रोल निभाया।
गणसुंदरी से हुई थी शुरुआत
1946 में गुजराती फिल्म गणसुंदरी से एक्टिंग की शुरुआत करने वाली निरुपा की पहली हिन्दी फिल्म 'हमारी मंजिल' थी। साल 1951 में आई फिल्म ‘हर हर महादेव’ में उनके पार्वती के किरदार को काफी सराहना मिली। जब वह वीर भीमसेन’ में द्रोपदी की भूमिका में नजर आईं तो दर्शकों ने उनकी एक्टिंग को सराहा। उसके बाद कई बार देवियों के किरदार में भी नजर आईं। लेकिन पहचान मिली रानी रूपमती से, जो लोगों के जेहन में आज भी जिंदा है।
कई बार मिला सम्मान
निरुपा को तीन बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार मिला। 1956 की फ़िल्म मुनीम जी के लिए यह पुरस्कार मिला था, जिसमें निरुपा देवानंद की माँ बनी थीं। 1962 की फ़िल्म छाया के लिए भी उन्हें पुरस्कृत किया गया। बाद में शहनाई के लिए 1965 में सम्मानित किया गया।
4 जनवरी को हुआ था जन्म
1999 में लाल बादशाह में आखिरी बार अमिताभ के साथ नजर आई। 4 जनवरी, 1931 को गुजरात के बलसाड़ में जन्मी निरुपा राय (कोकिला बेन) का 13 अक्टूबर 2004 को निधन हो गया था। रॉय ने पांच दशकों में करीब 300 फिल्मों में काम किया।
Updated on:
04 Jan 2020 04:39 pm
Published on:
04 Jan 2020 04:38 pm
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