
न गैस बनी न ही मिली बिजली, प्लांट पर करोड़ों रुपए खर्च, अब नए सिरे से तैयारी,न गैस बनी न ही मिली बिजली, प्लांट पर करोड़ों रुपए खर्च, अब नए सिरे से तैयारी,न गैस बनी न ही मिली बिजली, प्लांट पर करोड़ों रुपए खर्च, अब नए सिरे से तैयारी
भोपाल. शहर में पांच स्थानों पर बायोगैस बनाने के लिए प्लांट तैयार किए गए। इन पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन केवल एक को छोड़ बाकी सब ठप हो गए। इनसे न तो गैस बन पाई और न ही बिजली। वर्तमान में केवल विट्ठन मार्केट का प्लांट काम कर रहा है। यहां भी क्षमता से कम गैस बन रही है।
कचरे को निपटाने के साथ इससे गैस और बिजली बनाने की योजना के तहत तीन साल पहले प्लांट तैयार करने नगर निगम ने काम शुरू किया। शहर में पांच स्थानों का चुनाव करते हुए यहां पर प्लांट लगाने के लिए संसाधन जुटाए। ज्यादातर जगह पीपीपी मोड पर काम होना था। विट्ठन मार्केट में करीब दो करोड़ की लागत से इसे तैयार भी कर लिया गया। लेकिन प्लांट को पर्याप्त कचरा नहीं मिल रहा है।
ये मिले प्लांट के हाल
- विट्ठन मार्केट में बायो डेग्रेडेबल वेस्ट उठाने के समझौते से करीब दो करोड़ रुपए की लागत से यह प्लांट तैयार हुआ। पीपीपी मोड पर इसका निर्माण हुआ। आसपास बिजली और गैस सप्लाई इससे करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन क्षमता से बहुत कम सप्लाई हो रही है।
- शाहजहांनीपार्क के पास - बड़े क्षेत्र में प्लांट बना है। कचरा भी जमा किया जा रहा है। गैस बनाने की योजना थी लेकिन फिलहाल यह बंद है। जबकि यहां पर पूरा सेटअप तैयार है। यहां तैयार बायोगैस से जरूरतमंदों के लिए खाना तैयार करने की योजना थी। यहां गैस सिलेंडर का खर्च बजाया जा सकता था।
- सॉलिड वेस्ट निस्तारण के लिए भदभदा में कचरे से बायोगैस बनाने की योजना के तहत प्लांट लगाया गया। इस प्लांट से गैस नहीं बन पाई। लंबे समय तो यहां कचरे के ढेर लगे रहे। यहां भी योजना फेल हो गई।
- आरिफ नगर में भी एक प्लांट लगाया जाना था। यहां कचरा ट्रांसफर स्टेशन ही खत्म हो गया। गैस बनाने की योजना धरातल पर नहीं उतरी।
जिम्मेदार बोले बड़े स्तर पर चल रही तैयारी
कचरे से गैस बनाने की योजना के मामले में जिम्मेदारों ने कहा कि बड़े स्तर पर इसकी तैयारी चल रही है। शहर के पूरे कचरे का एक साथ इस्तेमाल कर उससे गैस बनाने के लिए काम होगा। अभी तक छोटे-छोटे प्लांट की योजना है। इसका विस्तार किया गया है।
क्यों हुए फेल
संयंत्र के आसपास कचरे का कलेक्शन तो हो गया लेकिन कहीं विरोध तो कहीं अफसरों के तबादले के कारण काम अटक गया। आरिफ नगर में आबादी के पास कचरे के चलते विरोध हुआ। तो कुछ स्थानों पर अफसरों के तबादले से प्रोजेक्ट रूक गया।
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वर्तमान में विट्ठन मार्केट स्थिति प्लांट से बायोगैस बन रही है। बाकी जगह अभी उपयोग नहीं है।
- आरके सक्सेना, प्रभारी इंजीनियर स्वच्छता सर्वेक्षण
Published on:
14 Apr 2022 12:47 am
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