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महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर अलग से शौचालय तक नहीं

जिम्मेदारों की अनदेखी, सुलभ शौचालयों में पुरुषों की आवाजाही रहती है ऐसे में महिलाएं उनका इस्तेताल नहीं कर पातीं

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जिम्मेदारों की अनदेखी

शगुन मंगल. भोपाल. देश के कई छोटे-बड़े शहरों में महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट हैं लेकिन 8 लाख महिलाओं की आबादी वाले प्रदेश की राजधानी भोपाल में महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थलों पर अलग से वॉशरूम तक की व्यवस्था नहीं है। वॉशरूम के नाम पर जगह.जगह बने 205 सुलभ शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि महिलाएं चाहकर भी इनका इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। सुलभ शौचालयों में पुरुषों की आवाजाही रहती है ऐसे में महिलाएं उनका प्रयोग करने में हिचकती हैं। बहुत जरूरी हुआ तो आपात स्थिति में वे निपट तो लेती हैं लेकिन अंधेरे में मुश्किल होती है।

सिर्फ दो शी लाउंज
2013-14 में भोपाल के तत्कालीन महापौर आलोक शर्मा ने महिलाओं के लिए शी टायॅलेट की तर्ज पर शहर में अलग से शी लाउंज बनाने की घोषणा की थी। तब इसके लिए 4 जगह आंवटित हुई थी। इनमें एमपी नगर, 10 नंबर, लिंक रोड और पॉलिटेक्निक चौराहा शामिल थे लेकिन अब तक सिर्फ दो ही शुरू हो पाए। उनकी भी अब हालत खस्ता है।

महिला दुकानों पर पुरुषों का कब्जा
शी लाउंज पर कुछ दुकानें भी बनाई गई। इनका संचालन महिलाओं को करना था लेकिन इन दुकानों पर अब पुरुष बैठते हैं। निगम प्रशासन का इस पर कोई ध्यान नहीं है। न्यू मार्केट, चौक बाजार जैसे मुख्य बाजारों में भी महिलाओं के लिए अलग से टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है।

इसलिए अलग वॉशरूम की जरूरत
-कॉमन वॉशरूम होने से सेफ्टी का खतरा
- ब्रेस्टफीडिंग की कोई सुविधा नहीं
- पुरुषों की आवाजाही से रात में खतरा
- गंदगी से यूरिनरी इंफेक्शन होता है
- सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता