
एम्स भोपाल हिर्शस्प्रुंग नाम की जटिल बीमारी से पीड़ित बच्चे का उपचार करने वाला पहला अस्पताल बन गया है। इसमें बच्चे के पेट पर बिना कोई चीरफाड़ किए केवल एक सर्जरी (प्राइमरी ट्रांसएनल एंडोरेक्टल पुलथ्रू) की गई है। यह सर्जरी मल उत्सर्जन के मार्ग के प्राकृतिक पथ से की जाती है। इस रोग के उपचार के लिए पहले दो या तीन सर्जरी की जाती थीं। इस सर्जरी में डॉ.अमित गुप्ता (सह प्राध्यापक) के नेतृत्व में बाल्य सर्जनों की एक टीम शामिल रही।
6 माह के बच्चे को लंबे समय से कब्ज और पेट फूलने की शिकायत के चलते बहुत बीमार हालत में लाया गया था। विशेष जांच और रेडियोलॉजी विभाग के सहयोग से किए गए कंट्रास्ट एनीमा और पैथोलॉजी विभाग के सहयोग से रेक्टल बायोप्सी के बाद 9 माह की उम्र में उसका ऑपरेशन किया गया। डॉ. अमित गुप्ता इस प्रक्रिया से बारह ऐसे रोगियों का पहले भी उपचार कर चुके हैं। सर्जरी के 6 माह बाद बच्चा बिल्कुल स्वस्थ है। उसका वजन बढ़ने के साथ-साथ सामान्य विकास हो रहा है। डॉ. अमित गुप्ता ने कहा कि इसमें पेट पर कट लगाने की कोई जरूरत नहीं होती है। पूरा ऑपरेशन प्राकृतिक मल उत्सर्जन मार्ग के माध्यम से किया जाता है। इस तरह की एक और सर्जरी इसके तीन महीने बाद की गई थी। इस तरह से एम्स में प्राथमिक टीईआरपी प्रक्रियाओं की कुल संख्या बढ़कर 2 हो गई है। दूसरे बच्चे में जन्म के तुरंत बाद इसके लक्षणों को देखा गया, ऐसे में 3 महीने की उम्र में उसका ऑपरेशन किया गया।
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एम्स में होम्योपैथी से बिना सर्जरी हुआ इलाज
भोपाल. सीधी जिले के 55 वर्षीय किसान अपने दाहिने पैर में घाव से एक साल से परेशान थे। उन्होंने इस बीमारी के उपचार के लिए अपने जिले के अस्पताल में संपर्क किया था। जहाँ उन्हें क्रोनिक वेनस अल्सर नामक बीमारी से पीड़ित बताया गया। साथ ही सर्जरी की सलाह दी गई थी। वह सर्जरी नहीं कराना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एम्स के आयुष विभाग में संपर्क किया। जहाँ उन्होंने इस बीमारी की होम्योपैथिक चिकित्सा कराई। 6 महीने तक लगातार होम्योपैथिक चिकित्सा लेने पर उनका घाव पूरी तरह भर गया है।
Published on:
22 Sept 2022 01:12 am
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