29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अब तुर्की नहीं जाएंगे जवाहर बाग के आम, लोगों ने किया बहिष्कार

MP News: भारत पाकिस्तान तनाव के बीच पाकिस्तान का समर्थन देने वाले तुर्की देश से सामान मंगाने और भेजने का बहिष्कार शुरू हो गई। देश में कई लोग इससे जुड़ रहे हैं। वहीं राजधानी का सबसे बड़ा जवाहर आम बाग भी इसमें शामिल हो गया।

less than 1 minute read
Google source verification
Jawahar Bagh mangoes will not go to Türkiye

MP News: भारत पाकिस्तान तनाव के बीच पाकिस्तान का समर्थन देने वाले तुर्की देश से सामान मंगाने और भेजने का बहिष्कार शुरू हो गई। देश में कई लोग इससे जुड़ रहे हैं। वहीं राजधानी भोपाल का सबसे बड़ा जवाहर आम बाग भी इसमें शामिल हो गया। इस बगीचे में आम की बीस से ज्यादा वैराइटी है। जिनका स्वाद कई विदेशी भी चख चुके है, लेकिन इस बार यहां से आम उन देशों को नहीं दिए जा रहे है जो यहां से खरीद तुर्की भेजना चाह रहे है।

ये भी पढ़े - कश्मीर मामले में अमेरिका की मध्यस्थता मंजूर नहीं

जवाहर आम बाग पचास साल पुराना

गोविंदपुरा आइटीआई के पास भेल का जवाहर आम बाग है। इसमें हापुस आम से लेकर पीटर इंग्लैंड जैसी करीब बीस से अधिक प्रजाति के आम होते हैं। यहां के आम मुंबई, बैग्लोर, पुणे सहित कई शहरों में जाते हैं। बाग की देखभाल करने वाले नवाब खां ने बताया कि जवाहर आम बाग पचास साल पुराना है। इस बार आम की पैदावार अच्छी हुई है। यहां के आम देश ही नहीं चीन, जापान और खाड़ी देशों तक जाते हैं। भारत के खिलाफ होने वाले तुर्की(Boycott Türkiye) के लिए इस बाग से आम नहीं जाएंगे।

बाग में पीटर इंग्लैण्ड सहित आम की 20 प्रजातियां

आम की खरीदी के लिए भेल क्षेत्र से सबसे ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं। भेल निवासी कृष्णकांत के मुताबिक इतनी वैराइटी कहीं और नहीं है। यहां पीटर इंग्लैण्ड, नरगिस, आम्रपाली, कृष्णभोग, जाफरान कोहिनूर, डालर, महाराजा, दय्यड, हिमसागर, मलका, कैंसर जैसी आम की कई वैराइटी हैं।

पचास एकड़ में करीब पांच सौ पेड़ः यह बाग भेल ने विकसित किया है। यहां करीब पचास एकड़ में करीब पांच सौ आम के पेड़ हैं। यह भेल कारखाने से यह सटा हुआ है, लेकिन अब बाग का दायरा पहले के मुकाबले कम हो गया है।

Story Loader