
Two strands of breath broken in accidents
भोपाल। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए शुरू की गई संबल योजना का नाम बदलने के बाद अब सरकार इसका दायरा भी छोटा कर रही है। मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना (संबल) में अब दुर्घटना पर मौत और घायल होने पर लाभ नहीं दिया जाएगा।
इस आदेश को श्रम विभाग ने अपने अफसरों को तत्काल अमल में लाने के निर्देश दे दिए हैं। श्रम विभाग का कहना है कि चंूकि इन मामलों में पहले से राजस्व पुस्तक परिपत्र के तहत पीडि़तों को आर्थिक सहायता दी जाती है। इसलिए इसे जनकल्ण योजना (संबल) में जोडऩे की जरूरत नहीं है।
दोहराव की आंशका-
श्रम विभाग के अधिकारियों को जारी आदेश में कहा गया है कि राजस्व परिपत्र के साथ संबल में भी दुर्घटना से जुड़े मामलों में आर्थिक सहायता का प्रावधान रखने से एक ही मामले में दो जगह से सहायता मिलने की आशंका बन रही है। इसलिए इसे संबल से हटाया जा रहा है।
तत्काल राहत देने शुरू की थी योजना-
तत्कालीन शिवराज सरकार ने मार्च 2018 में संबल योजना शुरू की थी। इस योजना में दुर्घटना में मृत और घायल श्रमिकों को तत्काल राहत मिल सके इसलिए मुआवजे और अनुग्रह राशि को जोड़ा गया था। ऐसे में संबंल के पंजीकृत श्रमिकों को अन्य विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ते थे। लेकिन सरकार के नए प्रावधान से दुर्घटना में मौत या अपंगता में राहत का मामला फिर से श्रम विभाग की जगह कलेक्टरों मे पाले में चला गया है।
अब इन मामलों में नहीं मिलेगी राहत-
प्राकृतिक आपदा, मकान गिरने, खेत में आग लगने, पानी में डूबने, बस या वाहन के नदी में डूबने, नाव डूबने, सांप एवं जहरीले जीवों के काटने से मृत्यु होने पर मृतक के परिजनों को 4 लाख की सहायता का प्रावधान जनकल्याण (संबल) योजना में था। जिसे सरकार ने समाप्त कर दिया है। वहीं इस तरह की दुर्घटनाओं में स्थाई दिव्यांगता पर 2 लाख और अस्थाई अपंगता पर 1 लाख रुपए दिए जाते थे। इसे भी बंद कर दिया गया है।
अब तक मिला इतनों को लाभ-
अभी तक संबल योजना में पंजीकृत श्रमिकों में से 7207 की दुर्घटना में मौत होने पर उनके परिजनों को चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई। वहीं दुर्घटना में घायल होने पर 198 श्रमिकों को सरकार ने अनुग्रह राशि बांटी है।
Updated on:
25 Oct 2019 07:01 am
Published on:
25 Oct 2019 06:58 am
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