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किसानों की झंझट खत्म, अब पटवारी भी कर सकेंगे जमीन का सीमांकन

किसान नामांकन-सीमांकन के काम में सबसे ज्यादा परेशान होते हैं पर मध्यप्रदेश में किसानों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है।

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मध्यप्रदेश में किसानों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी

भोपाल. किसान नामांकन-सीमांकन के काम में सबसे ज्यादा परेशान होते हैं पर मध्यप्रदेश में किसानों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब राजस्व निरीक्षक के साथ पटवारी भी जमीन का सीमांकन कर सकेंगे। इसके लिए मप्र भू-राजस्व संहिता के नियमों में संशोधन किया गया है. मप्र भू-राजस्व संहिता के नियमों में संशोधन को केबिनेट में भी मंजूरी दे दी गई।

अभी खेत या जमीन का सीमांकन का काम बहुत परेशानी भरा है. सीमांकन के काम में कई बार सालों लग जाते हैं. अब किसानों को इस काम में कुछ राहत दी जा रही है.
मप्र भू-राजस्व संहिता के नियमों में संशोधन के अनुसार अब प्रदेश में पटवारी भी जमीन का सीमांकन का काम कर सकेंगे. अभी तहसीलदार के आदेश के बाद केवल राजस्व निरीक्षक ही यह काम कर सकते हैं.

मध्यप्रदेश के राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि जमीन के सीमांकन के लिए अभी सबसे पहले तहसीलदार को आवेदन दिया जाता है। आवेदन के आधार पर तहसीलदार राजस्व निरीक्षक को रिपोर्ट तैयार करके देने के निर्देश देते हैं। राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार सीमांकन करने के आदेश जारी करता है। नए नियमों में राजस्व निरीक्षक के साथ पटवारी भी जमीन का सीमांकन का काम करेंगे। पटवारी भी सीमांकन संबंधी रिपोर्ट राजस्व निरीक्षक की तरह सीधे तहसीलदार को दे सकेंगे। इससे किसानों का खासी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

मप्र भू-राजस्व संहिता के नियमों में संशोधन के प्रस्ताव को राज्य केबिनेट की हरी झंडी भी मिल गई है. कैबिनेट की बैठक में राज्य के दूसरे अनुपूरक बजट प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव को अब विधानसभा के सदन में लाया जाएगा। इसमें करीब पंद्रह हजार करोड़ रुपए के प्रावधान किए गए हैं।