इसमें उपयोग किया गया नैनोएडसॉर्वेंट तीन रीजेनरेशन के बाद पेंट तथा सिरेमिक टाइल्स बनाने की इंडस्ट्रीज में उपयोग किया जा सकता है। डॉ सिंह ने बताया कि कई कंपनियों ने भी इस फिल्टर मोडेम को देखा और उसे अपनाने की इच्छुक हैं। कुछ और आवश्यक मॉनीटरिंग के बाद सीएसआईआर-एम्प्री यह टेक्नोलोजी ट्रांसफर कर सकेगा। एम्प्री के कार्यकारी निदेशक डॉएसएस अमृतफले के अनुसार यह तकनीक फ्लोराइड के अलावा दूषित पानी में से आर्सेनिक, क्रोमियम, लैड, कैडमियम आदि को अलग कर पीने योग्य बनाने में भी उपयोगी होगी। इसके साथ इंडस्ट्रियल वेस्ट में से हैवी मेटल्स अलग करने में भी उपयोग की जा सकेगी।