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जाति प्रमाण-पत्र में देरी, अभ्यर्थियों के फॉर्म अटके

- अब सरकार अलग से बनाएगी प्रकोष्ठ

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भोपाल। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा देने वाले आवेदकों के लिए जाति प्रमाण-पत्र जल्दी बनाने को लेकर सरकार को अलग से काम करना होगा। वजह ये है कि आयोग ने मध्यप्रदेश सरकार सहित सभी राज्यों को इसके लिए अलग से प्रकोष्ठ बनाकर काम करने के लिए लिखा है। इस पर प्रदेश सरकार ने सभी कलेक्टरों को परीक्षार्थियों के लिए जाति प्रमाण-पत्र बनाने की व्यवस्था को तेज करने के निर्देश दिए हैं। सभी जिलों को अब इस पर कदम उठाना होंगे। सरकार ने जिलों को गाइडलाइन भेजी है।

दरअसल, यूपीएससी (UPSC) और एमपी-पीएससी (MPPSC) की परीक्षाओं के लिए जाति प्रमाण-पत्र की जरूरत होती है। अभी सिविल सेवा और फॉरेस्ट सेवा के लिए परीक्षा होनी है। इसके लिए आवेदन भरे जाना है। यूपीएससी को विभिन्न जगहों से शिकायत मिली थी कि जाति प्रमाण-पत्र बनने में देरी के कारण फॉर्म भरने में दिक्कत है। इसके चलते आयोग ने परीक्षार्थियों के लिए निर्धारित अवधि में तेजी से प्रमाण-पत्र बनाने के लिए कहा हे। अब भी प्रदेश स्तर पर 15 हजार से ज्यादा आवेदन पेडिंग हैं।

ये है 4 स्टेज की प्रक्रिया
मध्यप्रदेश में लोकसेवा गारंटी केंद्रों से ऑनलाइन आवेदन के जरिए जाति प्रमाण-पत्र बनाए जाते हैं। चार स्तर की व्यवस्था है।, लेकिन यह इतनी पेचीदा है कि बड़ा समय लग जाता है। कई बार इस प्रक्रिया में फॉर्म भरने की अंतिम तिथि ही निकल जाती है।

ये है समस्या
केस 01: सिविल सेवा की तैयारी कर रहे गुमान सिंह तड़वाल कहते हैं, जाति प्रमाण-पत्र बनने दिया था, लेकिन दस्तावेज अधूरे बताकर प्रकरण रद्द कर दिया।


केस 02 : धनश्याम मौर्य का कहना है कि जाति प्रमाण-पत्र बनवाने आवेदन किया, लेकिन उसमें अभी रेकॉर्ड नहीं मिल पाए हैं। रेकॉर्ड उपलब्ध न होना लिखकर प्रकरण रद्द कर दिया गया है।

30 दिन की टाइम लिमिट, लग चुका है जुर्माना
बता दें, मध्यप्रदेश में जाति प्रमाण-पत्र बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन से 30 दिन की अवधि का समय तय है। लोकसेवा गारंटी के तहत यह आता है। इसमें कई बार 30 दिन में प्रकरण न निपटाने पर जुर्माना हुआ है। इसमें 250 रुपए प्रति प्रकरण जुर्माना किया गया है।