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प्रदेश में होगा अब एक कालोनाइजर लाइसेंस

- अपराधी नहीं बन पाएंगे कालोनाइजर- पांच वर्ष के अंदर करना होगा कालोनी का विकास कार्य

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भोपाल

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Ashok Gautam

Jan 18, 2022

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भोपाल। प्रदेश में अब 'एक प्रदेश-एक कालोनाइजर लाइसेंसÓ पर काम होगा। ये लाइसेंस पूरे प्रदेश के लिए इंटिग्रेडेड होगा, जिसके आधार पर कालोनाइजर किसी भी जिले में कालोनी काट सकेंगे। लाइसेंसे देने का काम नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त करेंगे। लाइसेंस 30 दिनों के अंदर दिया जाएगा। आवेदन निरस्त होने के बाद कालोनाइजर को अपील के लिए भी 30 दिनों का समय दिया जाएगा। अपील अस्वीकार होने पर कालोनाइजर फीस में से 20 फीसदी राशि काटकर शेष राशि वापस की जाएगी। कालोनाइजर को हर पांच वर्ष के बाद रजिस्ट्रेशन रिन्यू करना होगा। अपराधियों को कालोनाइजर लाइसेंस नहीं मिलेगा, जिन्हें दहेज प्रताडऩा अथवा किसी मामले में कोर्ट ने दोषी मानते हुए सजा सुनायी हो।
नगरीय निकायों के स्तर पर प्रत्येक कालोनी की मानीटरिंग होगी। नगर निगमों में निगम आयुक्त और नगर पालिका तथा नगर परिषदों में कलेक्ट मानीटरिंग करेंगे। टीएनसीपी से अनुमोदिन लेआउट प्लान के आधार पर अगर कालोनाइजर काम नहीं करते हैं तो उसके खिलाफ कार्रवाइ की जाएगी। विकास कार्यों के बाद कालोनियों के देख-रेख तथा विकास के लिए कालोनी समिति बनाई जाएगी, जो सहकारिता विभाग में को-आपरेटिव एक्ट के तरह रजिस्टर्ड होगी। कालोनाइजर को पांच वर्ष के अंदर कालोनी का विकास करना होगा, इसके बाद भी अगर कालोनाइजर विकास नहीं करता है तो निकाय उसे सिर्फ एक वर्ष का मौका और दे सकेगा। इसके बाद से उस पर पेनाल्टी लगाई जाएगी।


अब मुख्य मार्गों तक बनानी होगी सड़कें
कालोनाइजर को अब कालोनी की सड़कों को शहर के मुख्य मार्गों तक बनाना होगा। वह भी जैसे मुख्य मार्ग (कांक्रीट, डामर) की होगी, वैसी ही बनाना होगी। पूर्व में अगर सड़क बनी हुई है, तो उसको कालोनी की क्षमता के हिसाब से कालोनाइजर को चौड़ीकरण करना होगा। अन्य कालोनियों के मार्ग से भी उक्त कालोनी की सड़कों को जोडऩा पड़ेगा। जिससे लोगों को आपस में एक दूसरे कालोनी अथवा अन्य स्थानों में जाने-आने में किसी तरह की दिक्कतें न हों। इसके अलावा सीवेरेज, पानी बिजली की लाइनों को भी मुख्य लाइन से जोडऩा होगा। कालोनाइजर को सड़कों के दोनों तरफ पौधरोपण करना अनिवार्य होगा।

सरकारी एजेंसियों को नहीं लेना होगा लाइसेंस
शासकीय एजेंसियों को कोलोनाइलर का लाइसेंस नहीं लेना होगा, जिसमें हाउसिंग बोर्ड, विकास प्राधिकरण, स्मार्ट सिटी सहित अन्य निर्माण एजेंसियां शामिल हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए सभी कालोनाइजर को कुल भूखंड का 15 फीसदी भूखंड छोडऩा होगा।