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अब घर में इन पक्षी-जानवरों को पाला तो आपको होगी जेल

  -जानकारी के अभाव में लोगों को संरक्षित प्राणियों को पालना पड़ रहा महंगा-सावधान! एक गलती आपको बना सकती है वन्य जीव तस्कर.....

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wildlife smugglers

भोपाल। राजधानी में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जिनमें वन्य प्राणियों के संरक्षित होने की जानकारी नहीं होने के चलते आम आदमी अपराधी यहां तक के वन्य प्राणियों के खतरनाक तस्कर की श्रेणी में आकर खड़े हो जाते हैं। ऐसे मामलों में तमाम कोशिश करने पर भी नागरिक जेल जाने से नहीं बच पाते हैं। ऐसे में जागरुकता ही आपको अपराधी बनने से बचा सकती है।

केस-1

बीते वर्ष अक्टूबर में चार इमली के बंगला क्रमांक एफ 96 में रहने वाले डॉक्टर का मकान खाली कराते समय सम्पदा विभाग के कर्मचारियों को घर में पाले गए दो कछुए मिले। वन विभाग की टीम को सूचना देकर बुलाया गया तो संरक्षित कछुओं को अवैध रूप से रखने के लिए वन्य जीव अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज हुआ और डॉक्टर को जेल जाना पड़ा।

केस- 2

इसके कुछ ही समय बाद नवम्बर में अरेरा कॉलोनी स्थित एक बंगले में एक बुजुर्ग के पास कछुआ पला होने की शिकायत किसी ने दिल्ली की संस्था को की। संस्था की शिकायत पर वन विभाग ने जांच की तो बुजुर्ग के पास कछुआ मिला जिसे जब्त कर लिया गया। बुजुर्ग के खिलाफ संरक्षित प्रजाति को रखने का प्रकरण बना और 90 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग को जेल जाना पड़ा।

संरक्षित पक्षी है तोता

जिस सामान्य तोते को नागरिक सबसे ज्यादा पालते हैं, वह संरक्षित श्रेणी के है। इसी तरह टुईयां तोता, हीरामन तोता, काला सिर मुनिया, हरी मुनिया, लाल मुनिया, कोयल, सुर्खाब, मोर, जलमुर्गी ।

अपराध है कछुआ पालना

कछुए संरक्षित वन्य प्राणी है, कई प्रजातियां तो शेड्यूल वन की संरक्षित प्रजाति में आती हैं। कछुओं को बेचने खरीदने, कहीं लाने ले जाने या पालने पर वन्य प्राणी की तस्करी का केस दर्ज हो सकता है।

आलोक पाठक, डीएफओ, भोपाल का कहना है कि वन्य प्राणियों में कई प्रजातियों को शासन ने संरक्षित घोषित किया है। ऐसे प्राणियों को पकड़ना, कहीं भी लाना ले जाना, घर में रखना, पालना गंभीर अपराध है। ऐसा करने पर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण बनता है जिस पर तीन से सात साल की सजा और जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।