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वन नेशन, वन कैलेंडर अब त्योहार की तारीखों पर नहीं रहेगी उलझन

-केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने तैयार किया राष्ट्रीय हिंदू पंचांग, दिल्ली में राष्ट्रपति करेंगी विमोचन

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भोपाल

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Shakeel Khan

Feb 11, 2024

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त्यौहार की तिथि को लेकर बन रही भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए नक्षत्र योग व सूर्य, चंद्र गति के आधार पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय हिन्दू पंचाग तैयार कर रहा है। जिसका उद्घाटन दिल्ली में राष्ट्रीयपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी। इस पंचाग को तैयार करने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में स्थापित केंद्रीय संस्थान के ज्योतिषाचार्य की मदद ली जा रही है। इस पंचांग को तैयार करने में एक साल का समय लगा। अब यह पंचांग अंतिम चरणों में है।
राजा भोज के नाम से होगा प्रकाशन
विश्वविद्यालय के निदेशक रमाकांत पांडे ने बताया कि ज्योतिष की प्रमुख दो शाखाओं- सिद्धान्त एवं फलित ज्योतिष के अधिगम के लिए इस विभाग द्वारा प्रभावी तथा प्रायोगिक विधियों को स्वीकार किया जाता है। जहां ज्योतिषाचार्य भारतीय ज्योतिष व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक अध्ययन करते हैं। यह संस्थान स्थानीय सूर्योदय के आधार पर गणितीय आकलन करके प्रतिवर्ष श्री भाेजराज पंचांगम का प्रकाशन करता है। तीज त्यौहार को लेकर बन रही भ्रम की स्थिति को दूर करना है।
प्राचीन वेधशाला कोलकाता से लिया जाता है डेटा
पंचांग को अंतिम रूप देने के लिए भोपाल आए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय कर्नाटक के डायरेक्टर प्रो. हंसधर झा ने बताया कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार पंचांग होता है। भारत के समय अनुसार इसे तैयार किया जाता है। इस प्राचीन खगोलीय गणित के आधार पर तैयार किया जाता है। इसका डेटा प्राचीन वेधशाला कोलकाता से लिया जाता है जिसमें यह देखा जाता है कि सूर्य और चंद्र किस ग्रह में स्थित हैं। पंचांग को तैयार करते समय हम जिस शहर में हैं उसके समय का भी ध्यान रखा जाता है। क्योंकि राज्य के हिसाब से समय भी परिवर्तित हो जाता है।

एप भी किया जा रहा तैयार
उत्तराखंड से आए प्रोफेसर सुब्रमण्यम विश्वविद्यालय के देश में 13 कैंपस हैं। इस पंचांग को तैयार करने में सभी की भूमिका है। राजा भोज खुद एक ज्योतिषी थे। इसलिए उन्हें के नाम पर इस कैलेंडर का प्रकाशन किया जाता है। विश्वविद्यालय में एक-एक डाटा का मिलान कर गणना की जाती है। डाटा के आधार पर घटी, पल, नक्षत्र, तिथि, स्टैंडड टाइम, कर्ण, मद्रा, मूर्हत आदि की गणना विभाग द्वारा की जाती है। गणना का कार्य पूरे साल चलता रहता है। पूर्व के वर्ष तक यह केवल विश्विवद्यालयों तक ही सीमित रहता था, लेकिन अब इसे लोगों तक पहुंचाने के लिए एप भी तैयार किया जा रहा है।सन 2011 में की थी शुरूआत
इस पंचांग को देश भर के विद्वानों द्वारा तैयार किया जा रहा है। भोजराज पंचांग सन 2011 से संस्थान द्वारा तैयार किया जाता रहा है। यह मुख्त: संस्कृत में तैयार हो रहा है। इसकी खासबात यह है कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जा रहा है। इसका केंद्र बिंदू भोपाल रहेगा। इसमें सभी राज्यों के समय और पस्थिति के अनुसार त्यौहार, वृत, शादी विवाह का उल्लेख किया जा रहा है। जिससे देश के किसी भी कौन के लोग इसे देख का समझ सकें।
क्यों नहीं होगा मतभेद
विवि प्रबंधन के अनुसार पहले यह सिर्फ विश्वविद्यालय के लिए ही तैयार होता था। लेकिन इस समय यह बहुत अधिक देखने में आ रहा है कि त्यौहार, वृत को लेकर काफी विरोधाभास रहने लगा है। इसलिए यह राष्टीय कैलेंडर तैयार किया जा रहा है। इस पंचांग को तैयार करने के लिए व्यवहारिक एवं वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए संस्थान के पास आधुनिक उपकरणों से संपन्न एक प्रयोगशाला है। जो जिससे ग्रहों और नक्षत्रों का पता लगाया जाता है, जिससे किस तरह के भ्रम की स्थिति न रहे।
पॉकैट में भी रख सकेंगे
शुरूआत में इसकी पांच हजार प्रतियां तैयार की जा रही हैं। साथ ही कुछ पॉकैट कैलेंडर भी तैयार किए जाएंगे, जिसे व्यक्ति जेब में रखकर ले जा सकता है और कहीं भी देख सकेगा। यह लोग दे रहे अंतिम रूप
प्रोफेसर सुब्रमण्यम
प्रो. हंसधर झा
डॉ. रजनी
डॉ. उमेश कुमार पांडे
डॉ. अनिल कुमार
डॉ. आशीष चाैथरी
डाॅ. भूपेंद्र कुमार पांडे
डॉ. रविंद्र प्रसाद