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नर्सों की हड़ताल से टले ऑपरेशन, नहीं हो सकी बीपी-शुगर की जांच और मरीजों को दवा मिलने में देरी

1. कई नर्सों ने सुबह की शिफ्ट बाद शुरू की हड़ताल, फिर भी टले 12 ऑपरेशन2. जिला अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केंद्र में नर्सों के बाद आज से फार्मासिस्ट एसोसिएशन भी हड़ताल पर

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भोपाल. सरकारी अस्पतालों में कार्यरत रेगुलर नर्सों ने सोमवार से हड़ताल शुरू कर दी है। पहले दिन दोपहर 12 बजे तक नर्सें अपने-अपने कार्यस्थल के बहार आ कर बैठ गईं। ऐसे में सुबह की शिफ्ट तक अस्पतालों में सभी काम बिना बाधा के जारी रहे। मगर 12 बजे के बाद से अस्पतालों शुगर बीपी समेत अन्य जांचे बंद हो गई। भर्ती मरीजों को इंजेक्शन व दवाएं मिलने में देरी होने लगी। यही नहीं दोपहर बाद होने वाले 12 से ज्यादा ऑपरेशन टालने पड़े।


कामकाज प्रभावित
जेपी अस्पताल में सोमवार को सबसे पहले हड़ताल शुरू हुई। इसके बाद काटजू अस्पताल, कोलार स्वास्थ्य केंद्र, बैरागढ़ व बैरसिया सिविल अस्पताल में कार्यरत नर्सों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल का विकल्प चुना। इनके हड़ताल पर जाने से अब सारी जिम्मेदारी संविदा नर्सों पर है। जिनकी संख्या अस्पतालों में सिर्फ 30 फीसदी के करीब है। ऐसे में अब प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है।


यह हैं मांगे
नर्सिंग एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश जाट ने बताया कि ग्रेड पे, नाइट एलाउंस, स्टूडेंट स्टायफएंड समेत 10 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है। बता दें, अकेले भोपाल में हीं हड़ताल पर जाने वाली नर्सों की संख्या 350 के करीब है। वहीं संविदा नर्सों की संख्या इन पांचों केंद्र में 100 से भी कम है। जिसमें से लगभग 20 के करीब छुट्टी पर हैं।

नहीं मिलेंगी दवाएं
फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अंबर चौहान ने बताया कि वर्षो से मांगों को लेकर प्रयासरत फार्मासिस्ट आंदोलन की राह पर हैं। वेतनमान, पदनाम परिवर्तन, संचालनालय निर्माण समेत अन्य मांगों को लेकर मुख्यमंत्री सहित अधिकारियों को ज्ञापन भी दे चुके हैं। ऐसे में सभी फार्मासिस्ट 11 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। जिससे शासकीय दवाई मिलना बंद हो जाएंगी।


वर्जन
किसी भी मरीज को कोई परेशानी नहीं होने देंगे। सभी अस्पतालों में पूरी व्यवस्थाएं हैं। कुछ लोग ही हड़ताल पर गए हैं। उनसे भी लगातार बात की जा रही है।
-डॉ प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ, भोपाल