23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘ओशो के आश्रम में सजती थी सेक्स की मंडी’

21 मार्च को संबोधि दिवस है। ओशो के फॉलोवेर्स इसे मोक्ष या मुक्ति की शुरुआत मानते हैं।

3 min read
Google source verification

image

Nitesh Tripathi

Mar 21, 2016

 osho enlightenment day,sambodhi diwas,ma sheela a

osho enlightenment day,sambodhi diwas,ma sheela anand,sex,book,dont kill him,osho lover,osho enlightenment day celebration,enlightenment,enlightened osho

21 मार्च को संबोधि दिवस है। ओशो के फॉलोवेर्स इसे मोक्ष या मुक्ति की शुरुआत मानते हैं। देश विदेश में फैले ओशो फॉलोवेर्स के लिए ये खास दिन है। कहते हैं 1953 में 21 मार्च को एक विशेष वृक्ष मौलश्री के नीचे ओशो को संबोधि प्राप्त हुई। तब ओशो की उम्र बस 21 साल थी और वे वे जबलपुर में दर्शनशास्त्र के विद्यार्थी थे। पूरी दुनिया में जहां भी ओशो धाम है वहां इस दिन विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।




मध्य प्रदेश के रायसेन में हुआ था जन्म
ओशो का जन्म मध्य प्रदेश के रायसेन शहर के कुच्वाडा गांव में हुआ था। अपने भक्तों के बीच भगवान कहलाने वाले ओशो उर्फ़ रजनीश को लेकर कई विवाद भी सामने आए हैं, जिनमें से कई खुद उनकी शिष्या और प्रेमिका रही मां आनंद शीला ने अपनी किताब में लगा चुकी हैं।

sambodhi diwas

आरोपों के मुताबिक ओशो के आश्रम से 55 मिलियन डॉलर का घपला हुआ था, जिसमें उनकी शिष्या शीला को 39 महीने जेल में बिताने पड़े। जेल से निकलने के 20 साल बीत जाने के बाद शिष्या शीला ने एक किताब लिखी, जिसके जरिए उन्होंने कई अनछुहे पहलुओं को सामने रखा। इस किताब का नाम डोंट किल हिम! ए मेम्वर बाई मा आनंद शीला था।


महीने में 90 लोगों के साथ होता था सेक्स
प्रेमिका शीला की किताब के अनुसार ओशो के आश्रम में अध्यात्म के नाम पर सेक्स कीमंडी सजाई जाती थी। आश्रम में जो शिविर होते थे, उसमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय सेक्स होता। ओशो खुद अपने भक्तों को सेक्स के बारे में बताते और कहते कि सेक्स की इच्छा को दबाना नहीं चाहिए, ये कई कष्टों का कारण हो सकता है। वे कहते कि सेक्स को बिना किसी निर्णय के ‌स्वीकार करना सीखो।


इस तरह भक्तों की नजरों में भगवान का दर्जा पाए ओशो के उपदेशों को दर्शक सहर्ष स्वीकार करते और बिना किसी हिचकिचाहट और दबाव के आश्रम में खुलेआम सेक्स करते थे। किताब में इस बात का जिक्र है कि आश्रम का हर संन्यासी महीने में 90 लोगों के साथ सेक्स करता था।

sambodhi diwas

बीमारी होने पर भी सेक्स को प्रायोरिटी
ओशो के आश्रम में संन्यासी शिफ्ट में काम किया करते थे। संन्यासी उनसे इतने प्रभावित थे कि उन्हें अपनी परवाह भी नहीं होती और बीमारी के बावजूद के काम करते थे। उन्हें रात में सोने में भी कठिनाई होती। लेकिन बीमारी को नजर अंदाज करते करते कुछ को बीमारी की चपेट में आ गए। वे बुखार, और इंफेक्‍शन से पीड़ित हो गए थे।

इसकी मुख्य वजह आश्रम में चारों तरफ गंदगी का अंबार होना था। इन सबके बावजूद मां आनंद लिखती हैं कि भगवान ओशो को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और वे भक्तों को सेक्स की इच्छा नहीं दबाने के लिए कहते। उनकी बातों से आश्रम के संन्यासी बेफिक्र होकर सेक्स करते थे।

sambodhi diwas

शीला ने आगे किताब में जिक्र किया है कि, मुझे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि सारा दिन काम करने के बाद भी संन्यासी सेक्स के लिए उर्जा और समय निकाल लेते ‌थे। शीला आगे लिखती हैं एक दिन उन्होंने एक संन्यासी से पूछा, तो उसका कहना था कि वो हर दिन ‌तीन अलग-अलग महिलाओं के साथ सेक्स करता है।

30 रॉल्स रॉयस गाड़ियों की डिमांड
आनंद शीला के मुताबिक एक दिन ओशो ने उनसे एक महीने में 30 नई रॉल्स रॉयस गाड़ियों की मांग की। जबकि उनके पास पहले से ही 96 कारें थीं। ओशो को ये नई कारें बोरियत मिटाने के लिए चाहिए थीं। इन कारों को खरीदने के लिए करीब 3 से 4 मिलियन डॉलर चाहिए था। इतनी बड़ी रकम खर्च में कटौती करके जुटाई जा सकती थी। लेकिन भगवान ओशो ने पैसों के लिए 50-60 लोगों के नाम अपने शिष्या को दिए थे जो काफी धनी थे।