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गले और कंधे में कई गोलियों धंसी फिर भी 60 फीट चढ़कर दुश्मनों को मार डाला

गृहमंत्री ने महान योद्धा परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव को दी जन्मदिन की बधाई, खुद गंभीर होने के बावजूद पाकिस्तानी बंकर में घुसकर एक ग्रेनेड से चार पाकिस्तानी सैनिकों को मार दिया था यादव ने

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महान योद्धा परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव

भोपाल. कारगिल युद्ध विश्व के सबसे कठिन युद्ध में था। दुश्मन पहाड़ की चोटी पर बैठा था और हम नीचे थे पर भारतीय सैनिकों ने ऐसी जांबाजी दिखाई कि आखिराकर पाकिस्तान को भागना पड़ा। ऐसे ही बहादुर सैनिकों में सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव भी शामिल थे जिन्होंने खुद गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी पहाड़ पर कई फीट चढ़कर चार दुश्मनों को मार डाला था। बाद में इस असीम शौर्य पर उन्हें सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र प्रदान किया गया। मध्यप्रदेश के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने उनके जन्मदिन पर उन्हें बधाई दी है।

गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा—
कारगिल युद्ध में 15 गोलियां लगने के बावजूद टाइगर हिल पर तिरंगा लहराने वाले मां भारती के महान योद्धा परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।

मां पीतांबरा से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं सुदीर्घ जीवन की कामना करता हूं।

आइए जिन महान विजेता के लिए गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट किया है, हम उनके बारे में विस्तार से बताते हैं—

परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन योगेन्द्र सिंह Param Vir Chakra winner Yogendra Singh Yadav भारतीय सेना के सबसे कम उम्र में यह सम्मान प्राप्त करने वाले सैनिक हैं। उन्हें कारगिल युद्ध के दौरान 4 जुलाई 1999 के अपने साहसपूर्ण काम के लिए यह उच्चतम भारतीय सैन्य सम्मान से सम्मानित किया गया था। ग्रेनेडियर यादव को मात्र 19 वर्ष की आयु में परमवीर चक्र मिल गया था।

कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव 10 मई 1980 को यूपी के बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद अहीर गांव में जन्मे थे। उनके पिता रामकरण सिंह यादव भी सैनिक थे और 1965 तथा 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में भाग ले चुके थे। कारगिल युद्ध में टाइगर हिल चोटी फतह करने में उन्होंने अदम्य साहस दिखाते हुए जान की बाजी लगा दी और दुश्मन के बंकर में घुसकर तबाही मचा दी थी।

ग्रेनेडियर यादव 18 ग्रेनेडियर्स के साथ कार्यरत कमांडो प्लाटून 'घातक' का हिस्सा थे। 4 जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर तीन बंकरों पर कब्ज़ा करने का लक्ष्य था। ये बंकर बर्फ से ढके हुए 1000 फुट ऊंची चट्टान पर थे। यादव चट्टान पर चढ़ गए लेकिन रास्ते में दुश्मन ने मशीन गन और रॉकेट फायर कर दिया। प्लाटून कमांडर और दो अन्य शहीद हो गए और यादव को भी गले और कंधे में तीन गोलियां लगीं। गोली धंसने के बावजूद यादव 60 फीट की चढ़ाई चढ़ शीर्ष पर पहुंच गए। खुद गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी वह बंकर में घुसे और एक ही ग्रेनेड से चार पाकिस्तानी सैनिकों को मार डाला। मौका देख बाकी प्लाटून भी चट्टान पर आ चढ़े और टाइगर हिल पर काबिज होने में सफल रहे।