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पत्रिका अलर्ट…तेजी से फैल रहा ‘डीपफेक’ का संक्रमण

- पत्रिका पड़ताल: इस्टांग्राम से फोटो- वीडियो निकाल बनाई छात्रा की पोर्न - सोशल मीडिया में व्यक्तिगत फोटो और वीडियो शेयर करना हो सकता है जानलेवा

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बदलती तकनीक ने भले ही हमारे जीवन में बहुत सी चीजें आसान कर दी हो लेकिन इस तकनीक के दुरूपयोग ने हमारे जीवन की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी है। ताजा मामला आर्टिफिशियल इंजेलिजेंस तकनीक से जुड़ा सामने आ रहा है। जिसका डीपफेक टूल्स का संक्रमण सियासत से लेकर समाज में तेजी से फैल रहा है। इस चुनाव में इस टूल्स ने प्रदेश के दिग्गज नेताओं तक की मुश्किलें बढ़ा दी। पीएम मोदी तक एआई के डीपफेक टूल्स को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं। क्योंकि उनका गरबा खेलने का खुद एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया में वायरल कर दिया गया। वहीं पत्रिका की पड़ताल में कई केस ऐसे सामने आए हैं जो एआई के डीपफेक टूल्स का शिकार हैं लेकिन लोकलाज के डर से समाज के सामने खुलकर आने से डर रहे हैं।

इन दो घटना से समझिए कैसे सियासत से लेकर समाज तक फैल चुका डीपफेक का संक्रमण

पहला मामला

- हालही में आपने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से जुड़ा कौन बनेगा करोड़पति वाला वीडियो जरूर देखा होगा। उस वीडियो को पहली मर्तबा देखने पर आप सच और झूठ के बीच फर्क ही नहीं पता कर पाएंगे। दरअसल चुनावी समर में ये वीडियो खूब वायरल हुआ लेकिन हकीकत में ये वीडियो पूरी तरीके से फर्जी था। दरअसल ये डीपफेक का ही इस्तेमाल कर बनाया गया था।

दूसरा मामला

- राजधानी भोपाल की एक छात्रा ने बताया कि उसके इंस्टाग्राम पोस्ट से उसकी फोटो निकालकर पोर्न में तब्दील कर वायरल कर दिया गया। पहले वो समझ ही नहीं पाई ये कैसे हुआ और क्या करना चाहिए। लेकिन जब मामला पत्रिका टीम के पास पहुंचा तो उन्होंने फौरन पुलिस की मदद लेने के लिए भेजा। एक्सपर्ट ने बताया की ऐसा डीपफेक का इस्तेमाल कर ही बनाया जा रहा है।

ऐसे करें डीपफेक कंटेंट की पहचान

- डीपफेक वीडियो के चेहरों की मूवमेंट से पहचाना जा सकता है।
- शक होने पर फोटो और वीडियो के आईब्रो, लिप्सिंग के मूवमेंट से पहचान करें।
- कुछ प्लेटफॉर्म एआई जनरेटेड कंटेंट के लिए वॉटरमार्क का भी इस्तेमाल करते हैं।
- ऐसे मार्क या डिसक्लेमर को ध्यान से देखें।

डीपफेक का शिकार होने से ऐसे बचें

- व्यक्तिगत फोटो- वीडियो सोशल मीडिया में साझा करने से बचें।
- प्रोफाइल को हमेशा प्राइवेट रखें।
- अनजान वीडियो कॉल को नहीं उठाएं।
- अनजान व्यक्ति से दोस्ती नहीं करें।

डीपफेक को लेकर ये है कानून

भारत में इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के तहत डीपफेक संबंधी मामलों से निपटा जाता है। नागरिकों की प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए इस एक्ट में कई प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में अगर कोई डीपफेक वीडियो या तस्वीर किसी की मर्जी के बगैर बना कर कोई कानून तोड़ता है तो उसके खिलाफ शिकायत की जा सकती है। इस कानून की धारा 66 डी के तहत किसी के गुनहगार पाये जाने पर उसे तीन साल तक की सजा और 1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

सरकार को तत्काल ठोस कानून बनाने की जरूरत

- जिसके जितने ज्यादा सोशल मीडिया में वीडियो और फोटो मौजूद होंगे उसका उनता रियल डीपफेक कंटेट बनेगा। इसलिए कम से कम पब्लिक में वीडियो फोटो शेयर करें। दूसरा सरकार इसको लेकर ठोस कानून बनाए। जो डीपफेक के सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन मौजूद हैं उन पर वॉटर मार्क लगे ताकि डीपफेक कंटेंट की पहचान हो सके या इन पर बैन लगे।

सन्नी नेहरा, सायबर एक्सपर्ट, दिल्ली