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पत्रिका लगातार: मप्र दिव्यांग क्रिकेट टीम के खिलाड़ी को किट की दरकार

- रामकिशोर बोले- जनप्रतिनिधि के पास कई बार गया मिलते ही नहीं

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भोपाल@मध्यप्रदेश दिव्यांग क्रिकेट टीम के गेंदबाज रामकिशोर यादव जीवन की दोहरी चुनौतियों से जुझ रहे हैं। रामकिशोर छतरपुर जिले के रहने वाले हैं। पिता किसानी करते हैं और तीन भाई- बहनों का परिवार है। लेकिन घर के आर्थिक हालात कमजोर होने से अब संकट खड़ा हो गया है कि मैच खेलें या परिवार चलाने में कुछ अपना सहयोग दें। रामकिशोर ने बताया कि मूलभूत चीजों की मदद भी कोई करने वाला नहीं है। हमारे पास ना तो किट है और ना ही खेलने के लिए कोई मैदान। प्रशिक्षक मिलना तो बहुत दूर की बात है। अब सरकार यदि मदद नहीं करेंगी तो बताइए हम कैसे खेल पाएंगे।

जनप्रतिनिधि के आवास के चक्कर लगाकर थक चुके

रामकिशोर यादव ने बताया कि हम अपने क्षेत्रीय विधायक के घर कई मर्तबा गए लेकिन वो कभी मिलते ही नहीं है। भोपाल जाने का सोचता हूं लेकिन वहां जाने में भी खर्चा आएगा और कोई गारंटी तो है नहीं की जाने के बाद कोई अधिकारी मिलेगा या कोई मदद होगी। इसलिए वहां जाने का भी कोई फायदा नहीं है। रामकिशोर ने ये भी बताया कि जब कभी मैच होता है तो थोड़ा बहुत पैसे हम लोग मिलाते हैं और कुछ हमारे सीनियर देते हैं तब मैच खेलने जा पाते हैं।

कई दिव्यांग खिलाड़ी गुजर रहे माली हालात से

बता दें प्रदेश के कई दिव्यांग खिलाड़ी माली हालात के दौर से गुजर रहे हैं। ज्यादातर खिलाड़ियों का कहना है कि सरकारी स्तर पर उनकी कोई मदद नहीं होती है। अगर कहीं मैच का आयोजन होता है तो वो अपने स्तर पर ही व्यवस्था करके मैच खेलने जाते हैं। वहीं ज्यादातर दिव्यांग खिलाड़ियों के पास प्रशिक्षण के लिए न तो कोच की व्यस्था है और न ही दिव्यांगों के मुताबिक मैदान..ऐसे में कई खिलाड़ी तो अब खेल छोड़ने को भी मजबूर हैंं। क्योंकि माली हालात के आगे अब खेल का जुनून फिका पड़ने लगा है।