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भोपाल। मप्र नाट्य विद्यालय (एमपीएसडी) में स्टूडेंट्स और डायरेक्टर के बीच जो विवाद चल रहा है उसके पीछे प्रमुख वजह बजट की कमी बताई जा रही है। नाट्य विद्यालय का वार्षिक बजट करीब 2.5 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। यह बजट पिछले सात सालों से है। पत्रिका प्लस की पड़ताल में सामने आया कि इस साल नाट्य विद्यालय के खर्चों में जबरदस्त इजाफा हुआ लेकिन बजट की राशि जस की तस ही रही।
स्टूडेंट्स की संख्या और स्कॉलरशिप में इजाफा
एमपीएसडी में अभी तक प्रत्येक बैच में स्टूडेंट्स की संख्या 25 और प्रत्येक स्टूडेंट को बतौर स्कॉलरशिप पांच हजार रुपए प्रतिमाह मिलते थे। जबकि वर्ष 2018-19 स्टूडेंट्स की संख्या 26 हो गई और स्कॉलरशिप 5 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रुपए प्रतिमाह कर दी गई।
इस स्टाफ की सैलरी में इजाफा
एमपीएसडी के स्टाफ को मिलने वाली सैलरी में इस साल से इजाफा हुआ है, यहां स्थाई और संविदाकर्मी मिलाकर करीब 15 लोगों का स्टाफ है। इस साल से स्टाफ की सैलरी में 4 हजार से लेकर 12 हजार रुपए तक का इजाफा किया गया है।
अब इंटर्नशिप पर 30 की जगह 43 हजार रुपए
एमपीएसडी की ओर से स्टूडेंट्स तीन महीने की इंटर्नशिप में प्रोडक्शन के लिए 15 हजार रुपए दिए जाते थे जो बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दिया गया है। साथ ही तीन महीने इंटर्नशिप पर मिलने वाली 15 हजार रुपए की राशि को बढ़ाकर अब 18 हजार रुपए कर दिया गया है। अब इंटर्नशिप के दौरान स्टूडेंट्स को 30 की जगह करीब 43 हजार रुपए की राशि दी जाती है।
नाटकों की प्रोडक्शन कॉस्ट में इजाफा
नाट्य विद्यालय में हर साल करीब 4 से 5 नाटकों का प्रोडक्शन होता है। महंगाई के चलते अब प्रॉप्स से लेकर हर चीज महंगी हो चुकी है। जिसके चलते अब हर नाटक की प्रोडक्शन कॉस्ट पहले की तुलना में काफी अधिक है।
पूर्व निदेशक के समय खत्म हुआ 70 प्रतिशत बजट
नाट्य विद्यालय को सालाना बजट चार त्रैमासिक किश्तों में जारी किया जाता है। बजट की पिछली तीन किश्तों का तत्कालीन निदेशक संजय उपाध्याय के कार्यकाल में जारी हुई जबकि चौथी किश्त मौजूदा निदेशक आलोक चटर्जी के कार्यकाल में जारी हुई। पद छोडऩे से पहले पूर्व निदेशक तीन किश्तों की पूरी राशि विद्यालयीन कार्यों में खर्च कर चुके थे। इसके चलते भी भी वर्तमान में बजट की समस्या उत्पन्न हुई है।
Published on:
10 Feb 2019 11:40 pm
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