27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

प्रदेश में 17 जिलों तक पहुंचा पत्थलगढ़ी आंदोलन, सरकार के माथे पर आईं चिंता की लकीरें!

आदिवासियों का पत्थलगढ़ी आंदोलन प्रदेश के 17 जिलों तक फैल गया है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भोपाल

•

image

Umesh yadav

•

Updated: 8 May 2018, 7:13 AM IST

patthalgadi dispute

भोपाल. संविधान की 5वीं अनुसूची में अधिसूचित क्षेत्रों में पेसा एक्ट के अधिकारों को लेकर आदिवासियों का पत्थलगढ़ी आंदोलन प्रदेश के 17 जिलों तक फैल गया है। सिवनी, बालाघाट, उमरिया, डिंडोरी और मंडला में जड़ें गहरी होने से प्रशासन के लिए यह सिरदर्द है।

चिंता की बात यह है कि 12 अन्य जिलों में इसका विस्तार तेजी से हो रहा है। सिवनी में कुछ स्थानों से पत्थलगढ़ी हटाकर 30 आदिवासियों के खिलाफ आधा दर्जन से ज्यादा एफआइआर दर्ज हो चुकी है। इसका खुलासा राज्य सरकार को भेजी गई इंटेलीजेंस रिपोर्ट में हुआ है। इसकी प्रति 'पत्रिका' के पास भी है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के खरगोन, बड़वानी, धार, आलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, बैतूल, होशंगाबाद, शहडोल, दमोह, छिंदवाड़ा और अनूपपुर में तेजी से समानांतर ग्राम सभाओं का गठन हो रहा है। सिवनी कलेक्टर गोपाल चंद डाड ने कहा, टेटमा में रेत उत्खनन पर कब्जा करने की जानकारी मिलते ही हमने तत्काल कार्रवाई की।

कुछ लोगों के खिलाफ भारत सरकार के चिन्ह वाली टीपी काटने पर एफआईआर दर्ज की। कुछ आदिवासी संगठन पेसा एक्ट को लेकर अधिसूचित क्षेत्रों में भ्रम फैला रहे हैं। हम जनजागरूकता अभियान चलाकर आदिवासियों को समझा रहे हैं।

आदिवासी नेता पर राष्ट्रद्रोह का मामला
सिवनी पुलिस सितंबर 2017 में इस आंदोलन के अगुआई करने वाले झारखंड आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय महासचिव कृष्णा हसंदा के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज कर चुकी है। उनकी करीबी बबीता कच्छप की निगरानी की जा रही है।

इधर, मालवा में सक्रिय आदिवासी संगठन जयस पुलिस के निशाने पर है। इस पर आरोप है कि धार वक्र्स फैक्ट्री में पांचवीं अनुसूची का हवाला देकर वहां के आदिवासी कामगारों को भड़काया गया। पेसा एक्ट में राजस्व वन और संरक्षित वनों में रहने वाले आदिवासियों को अधिकार देने के लिए ग्राम सभा गठित करने के जून 2015 में नियम बने थे, लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाया।

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार किसी भी कलेक्टर और डीएफओ ने अधिसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाएं गठित करने मेें दिलचस्पी नहीं ली। यहां तक कि राज्य सरकार ने इसकी समीक्षा भी नहीं की।

ये संगठन हैं सक्रिय
पत्थलगढ़ी आंदोलन को लेकर प्रदेश में आदिवासी एकता परिषद, जयस, गोंडवाना महासभा, आदिवासी समाज संगठन, आदिवासी एकता महासभा, श्रमिक आदिवासी संगठन, समाजवादी जन परिषद, आदिवासी मुक्ति मोर्चा।