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पौष माह में जलाभिषेक करते ही महादेव को लगी ठंड, सर्दी से बचाने पहनाए गर्म कपड़े और ओढ़ाई ऊनी शॉल

इस साल का पहला प्रदोष मंगलवार को श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस मौके पर शहर के शिवालयों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए। श्रद्धालुओं ने व्रत रखे और पूजा अर्चना की। इसी प्रकार मंदिरों में भी सुबह जलाभिषेक, रूद्राभिषेक के साथ पूजा की गई और प्रदोष काल में शृंगार किया...

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इस साल का पहला प्रदोष मंगलवार को श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस मौके पर शहर के शिवालयों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हुए। श्रद्धालुओं ने व्रत रखे और पूजा अर्चना की। इसी प्रकार मंदिरों में भी सुबह जलाभिषेक, रूद्राभिषेक के साथ पूजा की गई और प्रदोष काल में शृंगार किया। पौष माह में सर्दी को देखते हुए शहर के कई मंदिरों में श्रृंगार के बाद गर्भगृह में अलाव जलाए और भगवान भोलेनाथ को गर्म कपड़े धारण कराए गए। इस मौके पर भजन कीर्तन भी हुए।

बड़वाले महादेव मंदिर में एक क्विंटल फूलों से शृंगार

शहर के बड़वाले महादेव मंदिर में मंगलवार को प्रदोष पर विशेष पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर सुबह यहां जलाभिषेक, रूद्राभिषेक किया गया। मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में दर्शनार्थी दर्शन के लिए पहुंचे। इसी प्रकार शाम को मंदिर में गुलाब, मोगरा, रजनीगंधा सहित विभिन्न प्रकार के एक क्विंटल फूलों से भगवान वटेश्वर का शृंगार किया गया और फूलों से रंगोली सजाई गई। मंदिर समिति के संजय अग्रवाल ने बताया कि इस मौके पर गर्भगृह में अलाव जलाए और शाल ओढ़ाई गई। इस मौके पर केसरिया दूध, ड्राई फ्रूट के लड्डू, गुड़ की गजक आदि का भोग लगाया।

मुक्तेश्वर महाकाल की भस्म आरती और श्रृंगार

साल के पहले प्रदोष पर छोला विश्राम घाट के मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का विशेष शृंगार किया और रात्रि तक दर्शन का सिलसिला चलता रहा। मंदिर के पं. गोपालकृष्ण पुरोहित ने बताया कि मंदिर में खास उत्सवों पर भगवान की भस्म आरती की जाती है। मंगलवार को साल के पहले प्रदोष के मौके पर सुबह भस्म आरती की गई और विशेष पूजा अर्चना हुई। इसी प्रकार शाम को भगवान का 50 किलो फूलों से श्रृंगार किया और अलाव जलाए गए। इस मौके पर रात्रि तक दर्शन का सिलसिला जारी रहा।

गुफा मंदिर में पूजा-अर्चना

लालघाटी गुफा मंदिर में भी प्रदोष के मौके पर विशेष पूजा हुई। सुबह मंदिर में भगवान का रूद्राभिषेक, अभिषेक किया गया। वैदिक पंडितों द्वारा पूजा अर्चना की गई और फूल, धतुरा सहित प्राकृतिक वस्तुओं से भगवान भोलेनाथ का श्रृंगार किया गया। मंदिर के पं. लेखराज शर्मा ने बताया कि इस समय पौष कृष्ण पक्ष चल रहा है, जिसमें सर्दी अत्यधिक रहती है। इस हिसाब से भगवान को ऊनी शाल धारण कराई गई।

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