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एक कुटीर मांगने की MP में इतनी बड़ी सजा! कि सचिव ने कागजों पर बता दिया मृतक

- सचिवों पर पैसे मांगने का आरोप - पीड़ित जिंदा होने का दे रहे हैं प्रमाण- सचिव पर हो सकती है कार्रवाई

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एक कुटीर मांगने की MP में इतनी बड़ी सजा! कि सचिव ने कागजों पर बता दिया मृतक

एक कुटीर मांगने की MP में इतनी बड़ी सजा! कि सचिव ने कागजों पर बता दिया मृतक

भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों कई जगहों से लगातार जीवित लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी के चलते जहां कुछ दिनों पहले ही राजगढ़ की एक जनसुनवाई में एक वृद्ध की इस आवाज ने कि 'हम अभी जिंदा हैं' वहां बैठे सभी लोगों को चौंका दिया था। जबकि सरकारी कागजों में उस दंपती को मृत दर्ज कर दिया गया था।

वहीं अब एक बार फिर कुछ इसी तरह का मामला गुना से सामने आया है। जहां पीएम आवास योजना के तहत कुटीर की चाहत में पैसा न देना इतना महंगा पड़ा कि चांचौड़ा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत रामनगर की 84 वर्षीय शांतिबाई मीना और कुंभराज तहसील के ग्राम पंचायत बनेठ के 60 वर्षीय रामप्रसाद मीना को सचिवों ने कागजों में मृत घोषित कर दिया।

इनका दोष सिर्फ ये है कि इन्होंने कुटीर के लिए सचिव द्वारा मुंह मांगी रकम देने से इनकार कर दिया था। ये दोनों अपने-अपने जिन्दा होने का प्रमाण क्षेत्रीय विधायक से लेकर जनपद पंचायत के अधिकारियों को दे चुके हैं। इसके बाद भी कुटीर नहीं मिल पाई है।

मांगे दस हजार...
इसी जनपद के तहत एक व्यक्ति का वर्ष 2011 में कुटीर के लिए चयन हुआ था। लिस्ट में उसका नाम भी आ गया था। इसी बीच ग्राम पंचायत के सचिव ने कुटीर के एवज में दस हजार रुपए मांगे, जब वह पैसा नहीं दे पाया तो कुटीर की सूची में से उसका नाम गायब कर दिया गया। इतना ही नहीं उसे मृत घोषित कर दिया। जिससे उसे कुटीर नहीं मिल पाई।


वृद्धा महिला को पेंशन मिल रही है, वह जिन्दा है, उसको मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया है। यह मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की बात पर सचिव राजेन्द्र सिंह मना कर रहा है। मैंने सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ऐसे ही दूसरे वृद्ध रामप्रसाद मीना को मृत बताने की शिकायत मिली है।
- हरिनारायण शर्मा, सीईओ जनपद पंचायत चांचौड़ा

सब जगह शिकायत, दे रहे प्रमाण
चांचौड़ा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत रामनगर लोधापुरा में रहने वाली 84 वर्षीय शांति बाई मीना बताती हैं कि मैंने कुटीर के लिए आवेदन किया था, इस गांव के सचिव ने मुझसे और मेरे बेटे से कुटीर देने के एवज में पांच हजार रुपए मांगे थे, वह नहीं दिए तो उसने मुझे सरकारी दस्तावेज में मृत घोषित कर दिया।

मैंने इसकी शिकायत अपने सरपंच, जनपद पंचायत के सीईओ और क्षेत्रीय विधायक को की है और अपने जिन्दा होने का प्रमाण भी दे रही हूं, लेकिन कुटीर अभी तक नहीं मिल पाई है।

ग्राम पंचायत रामनगर के सरपंच संतोष का कहना था कि मैं इसकी शिकायत जनपद पंचायत के सीईओ से कर चुका हूं। क्षेत्रीय विधायक लक्ष्मण सिंह का कहना है कि यह दोनों मामले गंभीर हैं, ऐसे सचिवों को नौकरी पर रहने का कोई अधिकार ही नहीं हैं।

मेरे लड़के से मांगे थे दस हजार रुपए
ग्राम पंचायत बनेठ में रहने वाले साठ वर्षीय रामप्रसाद मीना ने पत्रिका को बताया कि वह कच्चे मकान में रहता है। सन् 2011 की सूची अनुसार कुटीर के सर्वे सूची में मेरा नाम आ गया था।

उसका कहना था कि कुटीर की जानकारी मिलने पर मेरे घर वाले बहुत खुश हुए थे। उसका आरोप है कि ग्राम पंचायत बनेठ का सचिव राजेन्द्र प्रसाद मीना ने मेरे लड़के विजय से कुटीर के बदले दस हजार रुपए मांगे। गरीब होने पर न मैं यह पैसे नहीं दे पाया तो सचिव ने मुझे कागजों में मरा बता दिया।

ऐसा करके मुझे सचिव ने कुटीर नहीं मिलने दी। उसका कहना था कि मैं अपने जिंदा होने का प्रमाण सरपंच, विधायक और पंचायत के अधिकारियों के पास जाकर दे आया हूं और लेकिन सचिव ने कुटीर न देकर कागजों में मुझे मृत बता दिया।