
ऐसी वारदात पहले कभी नहीं हुई
शहर में ऐसी वारदात पहले कभी नहीं हुई थी। 2023 में यह पहला मौका है जब एक साथ 9 लोगों ने 24 घंटे के अंदर फांसी के फंदे पर झूल कर मौत को गले लगा लिया। शहर के आठ थाना क्षेत्रों में इन लोगों ने फांसी लगाई। किसी ने आर्थिक तंगी तो किसी ने डिप्रेशन के चलते आत्मघाती कदम उठाया।
पुलिस को किसी भी मामले में मृतक का सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है। पिपलानी में पति को शराब पीने से रोकने पर विवाद हुआ तो टीटी नगर में मृतक नौकरी नहीं मिलने से परेशान था। कोई आर्थिक तंगी से परेशान था तो कोई लंबे समय से डिप्रेशन में चल रहा था। किसी के परिवार में तनाव बना हुआ था।
इन 9 मामलों से शहर में सनसनी
1. पिपलानी पुलिस के अनुसार 28 वर्षीय ललिता कुशवाहा आनंद नगर में रहती थी। जिस किराए के मकान में वह रहती थी उसी मकान में नीचे के फ्लोर पर माता-पिता भी रहते हैं। बीती रात वह फांसी के फंदे पर झूल गई। इसके बाद परिजन फंदे से उतारकर उसे लेकर जेपी अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में पता चला है कि घटना से पहले महिला का पति से शराब पीने पर विवाद हुआ था।
2. बागसेवनिया पुलिस ने बताया कि 19 साल का करण नोबल स्कूल के पास बस्ती में रहता था वह काम नहीं मिलने से परेशान था, घर वालों से झगड़ा भी होता रहता था। दो दिन पहले भी परिजनों ने उसे टोका था, इसी बात को लेकर करण ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
3. बजरिया के विजय नगर में रहने वाले 35 वर्षीय महेश अहिरवार ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
4. हबीबगंज पुलिस ने बताया कि 26 साल के राजेश ज्योतिफुले नगर झुग्गी बस्ती में रहता था। आर्थिक तंगी से परेशान था। वह फांसी के फंदे पर झूल गया।
5. टीटी नगर पुलिस ने बताया कि 26 साल का दीपक नामदेव शिव नगर में रहता था। वह बीटेक का छात्र था। बहनें बाजार गई हुई थी, लौटकर आकर देखा तो वह फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। उसने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
6. शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र के वाजयेपी नगर में 45 वर्षीय सुनील फांसी के फंदे पर झूल गया। यहां भी पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
7. टीलाजमालपुरा में 24 वर्षीय सोमनाथ ने फांसी लगा ली।
8. कमला नगर में 60 वर्षीय जयराम सिंह ने डिप्रेशन में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
9. छोला पुलिस ने बताया कि छोला निवासी रवि गौड़ रेलवे फाटक के पास रहता था। वह हम्माली का काम करता था। काम नहीं मिलने से परेशान रहता था। इसी वजह से उसने फांसी लगा ली।
पुलिस और मनोवैज्ञानिक इस बात को लेकर हैरानी में है कि लोग अब समस्याओं से संघर्ष करने की बजाय मौत को गले लगाना ज्यादा आसान समझ रहे हैं।
आधुनिकता की चकाचौंध, सब्र की कमी
जेपी अस्पताल के मनोवैज्ञानिक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जेपी बैरागी के मुताबिक सामाजिक व घरेलू परेशानियों से तंग आकर मौत को गले लगाना लोग आसान समझने लगे हैं। ये आधुनिकता की चकाचौंध में पीछे रह जाने व मानव व्यवहार में आ रहे सब्र की कमी का नतीजा है। आज लोग थोड़ी सी असफलता मिलने पर निराश हो जाते हैं, थोड़ा सा संघर्ष उन्हें जीवन भर का संघर्ष लगने लगता है। घर पर किसी समस्या या विवाद से वो जल्दी हार मान लेते हैं और सब्र समाप्त कर लेते हैं। इसके बाद मौत को गले लगाना उनके लिए आसान हो जाता है, लेकिन यह कोई तरीका नहीं है। 20 साल पहले के जमाने में लोग पूरी जिंदगी संघर्ष करते थे फिर भी हार नहीं मानते थे आज इसकी घोर कमी है।
Published on:
03 Sept 2023 09:06 am

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