
After the inspection of the annual parade, the IG listened to the problems of policemen by placing a court.
भोपाल. सोशल मीडिया पर बहुत समय बरबाद होता है, लेकिन टेक्नोलॉजी के युग में इससे पूरी तरह बचा भी नहीं जा सकता। अधिकारी और पुलिसकर्मी सोशल मीडिया का उपयोग बेहद संभलकर करें। ग्रुप में शामिल हों, लेकिन आपके एडमिन रहते ग्रुप पर कोई भड़काऊ पोस्ट चली, तो आपको हम भी बचा नहीं पाएंगे। अपनी व्यक्तिगत राय देने से भी बचें।
यह सलाह आईजी जयदीप प्रसाद ने मंगलवार को नेहरू नगर पुलिस लाइन में पुलिसकर्मियों से चर्चा करते हुए कही। इससे पहले उन्होंने वार्षिक परेड निरीक्षण करने के बाद दरबार लगाकर पुलिसकर्मियों की समस्याएं सुनीं। आईजी ने दरबार के दौरान पुलिसकर्मियों को जनता से तहजीब के साथ व्यवहार करने से लेकर आचार-व्यवहार को लेकर कई सीख दीं।
दंगा नियंत्रण में ट्रैफिक पुलिस कमजोर
आईजी ने परेड का निरीक्षण करने के साथ पुलिसकर्मियों की दंगा नियंत्रण की मॉक ड्रिल देखी। किसान आंदोलन जैसी परिस्थितियों में हालात पर काबू पाने की ड्रिल देखने के बाद उन्होंने पुलिस की ड्रिल पर संतोष जताया, लेकिन ट्रैफिक पुलिस के जवानों की प्रतिक्रिया को कमजोर बताया।
पुलिसकर्मियों ने उठाई यह समस्याएं
- आरक्षक सुनेहा पांडे ने बताया कि दूसरे राज्यों के बालगृह में बच्चों को छोडऩे जाते समय बस, ऑटो, नाश्ते जैसे कई खर्च होते हैं, लेकिन वारंट के अलावा कोई खर्च नहीं मिलता।
- सूखी सेवनिया थाना प्रभारी महेन्द्र मिश्रा ने देहात थानों में कम्प्यूटर यूपीएस न होने का मुद्दा उठाया।
- अशोका गार्डन के आरक्षक ने दोपहिया पर गश्त के समय दोनों पुलिसकर्मियों के हेलमेट पहनने से वायरलेस सुनने में समस्या होने की बात कही, जिस पर आईजी ने कहा कि आपकी समस्या सही हो सकती है, लेकिन यह कानून हैं।
- अधिकारी शहर के सभी थानों में महिला सुविधाघर बनवाए जाना सुनिश्चित करें।
- जारी होने वाले बजट से शहरी थानों में जिम और ग्रामीण क्षेत्र के थानों में बास्केट बॉल कोर्ट बनवाएं।
- जहांगीराबाद थाना प्रभारी प्रीतम सिंह ठाकुर ने कहा कि निंदा जैसी मामूली सजा की खबर मीडिया तक पहुंच जाती है। उन्होंने खुद को हाल ही मिली सजा का जिक्र करते हुए कहा कि हाल में मिली छोटी सी सजा की खबर परिवार ने अखबार में पढ़ी उन्हें चिंता होने लगी। जिसका असर बुरा पड़ता है। इस पर आईजी ने मीडिया से सजा के साथ मिलने पुरस्कारों पर भी समाचार बनाने की अपील की वहीं, अधिकारियों से छोटी सजाओं को प्रचारित न करने की ताकीद की।
अनुशासनहीनता या भूल
इसे अनुशासनहीनता कहें या अनजाने में हुई गलती, कार्यक्रम में डीआईजी का वर्दी पहनने का अंदाज अलग दिखा। एक ओर आईजी जयदीप प्रसाद पुलिसकर्मियों को अनुशासन से लेकर आम जनता से आचार-व्यवहार का पाठ पढ़ा रहे थे। दूसरी ओर डीआईजी संतोष कुमार सिंह वर्दी की बांहें फोल्ड किए हुए बैरेड कैप लगाए खड़े थे। जबकि, बाकी सभी अधिकारी पूरी वर्दी में थे। आईजी के साथ परेड निरीक्षण से लेकर पूरे कार्यक्रम में डीआईजी का यही अंदाज रहा। डीआईजी के इस कैजुअल स्टाइल को लेकर पुलिसकर्मी भी आपस में खुसर-फुसर करते दिखे।
Published on:
13 Dec 2017 10:55 am
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