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राजनीतिक दलों की एडवांस बुकिंग, जानिये क्या है माजरा…

चुनाव से इनकी भी चांदी कुक, टेंट, कैमरे सब बुक...

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राजनीतिक दलों की एडवांस बुकिंग, जानिये क्या है माजरा...

भोपाल। चुनावी माहौल के बीच रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। शहर के करीब 500 टेंट कारोबारियों का धंधा गुलजार होने लगा है। चुनावी सभाओं और रैलियों में मंच व वाहन रैलियों के साथ ही ड्रोन कैमरों से एलईडी वॉल पर लाइव प्रसारण का चलन बढ़ा है।

बड़े टेंट कारोबारी डिमांड और सप्लाई में संतुलन बनाने के लिए 500 से ज्यादा छोटे कारोबारियों के नाम की बुकिंग भी कर रहे हैं। 2013 के चुनाव में टेंट कारोबारियों ने करीब पांच करोड़ रुपए कमाए थे।

10000 रुपए तक का मंच
नेताओं की भाषणबाजी के लिए मजबूत मंच बनाने का चलन है। इसकी लागत 450 रुपए प्रति वर्गफीट आती है। स्थानीय कार्यक्रमों में ऐसे मंच 10 हजार रुपए तक में बनते हैं।

दो लाख रुपए तक आते हैं पांडाल
अब वॉटर प्रूफ और एसीयुक्त पांडाल बनाने का चलन है। ऐसे पांडाल एल्यूमिनियम कॉलम पर कैनवास की चादरों से तैयार होते हैं। इनमें एसी मशीनों के ब्लोअर लगते हैं। इनकी लागत दो लाख तक है।

150 से 250 रुपए प्रति प्लेट खाना
प्रत्याशी प्रचार के लिए शहर में कई स्थानों पर चुनाव कार्यालय खोलते हैं। हलवाइयों को उनकी टीम के साथ बुलाया जाता है। आमतौर पर ये ठेके प्रति प्लेट के हिसाब से दिए जाते हैं, जिसमें सुबह और शाम की चाय नाश्ता, दोपहर और रात का खाना शामिल होता है। ठेके 150 से 250 रुपए प्रति प्लेट की दर पर दिए जाते हैं।

एलईडी वॉल, ड्रोन-क्रेन कैमरों से रेकॉर्डिंग
चुनावी सभाओं को आकर्षक बनाने एलईडी वॉल-ड्रोन-के्रन कैमरों से रेकॉर्डिंग कर इनका लाइव प्रसारण किया जाता है, ताकि भीड़ ज्यादा जुट सके।

एक एलईडी वॉल का किराया 6000 रुपए प्रतिदिन, ड्रोन-कैमरे पर तीन घंटे के 3000 रुपए, क्रेन कैमरे से भीड़ कवर करने पर 6000 रुपए प्रतिदिन और लाइव टेलीकास्ट करने पर मिक्सिंग मशीन का 7000 रुपए प्रतिदिन तक किराया लिया जाता है।

टिकट वितरण के बाद टेंट कारोबार में डिमांड बढ़ती है। बड़े कारोबारी काम ज्यादा मिलने पर छोटे सप्लायर्स से मदद लेते हैं। ऐसे में सभी को अच्छा काम मिल जाता है। शहर के करीब 500 कारोबारी चुनाव में कुछ न कुछ कमाई तो कर ही लेते हैं।
- रिंकू भटेजा, अध्यक्ष, भोपाल टेंट हाउस एसोसिएशन

और इधर कानाफूसी :नेताओं पर आचार्य संहिता
इन दिनों नेताओं पर आचार संहिता के साथ-साथ आचार्य संहिता भी लगी हुई है। पांडालों में तो दूर नेता अपने घर में भी पूजा-पाठ करवाने में डर रहे हैं। जो नेता मंदिर में या पांडालों में आरती में शामिल होते हैं, उनसे भी वहां के पुजारी जल्दी जाने का निवेदन कर रहे हैं।

नेताओं को चुनाव आयोग के साथ-साथ अब बाबा-पुजारी और आचार्यों का भी डर लगने लगा है। बिट्टन मार्केट की झांकी के बाहर नेताजी अपने समर्थकों से कहते नजर आए कि उन पर आचार संहिता तो ठीक है, लेकिन अब तो आचार्य संहिता भी लग गई है।