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सिंधिया के हाथ में हैं इन सीटों के टिकट! बिना सहमति कांग्रेस नहीं कर पाएगी तय…

इन सीटों पर सिंधिया का सीधा दखल...

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Scindia

सिंधिया के हाथ में हैं इन सीटों के टिकट! बिना सहमति कांग्रेस नहीं कर पाएगी तय...

भोपाल। कांग्रेस की ओर से भले ही गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का भार सौंप दिया गया हो। लेकिन इसके बावजूद मध्यप्रदेश में भी कई स्थानों पर उनके दिशा निर्देशों के आधार पर ही पार्टी काम करेगी।


इससे पहले ये माना जा रहा था कि मध्यप्रदेश की राजनीति से दूर करने के लिए सिंधिया को हाशिये पर डालते हुए उनके विरोधियों ने उन्हें मध्यप्रदेश से यूपी पहुंचवा दिया।

लेकिन चुनाव नजदीक आते ही एक बार फिर प्रदेश में उनकी ताकत समाने आई है। जहां अब प्रदेश की कई लोकसभा सीटों पर उनकी राय के बाद ही टिकट चयन की बातें सामने आ रहीं हैं।

ये बन रही थी धारणा!
अब तक माना जा रहा था कि सिंधिया को यूपी भेजकर प्रदेश की राजनीति से अलग थलग कर दिया गया है। वहीं इसके अलावा दिग्विजय को भी भोपाल सीट से चुनाव लड़वा कर प्रदेश में कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।


ऐसे में कई बार ये बातें भी चर्चा में रहीं कि कमलनाथ अपने पास ही प्रदेश की पूरी ताकत रखना चाहते हैं, साथ ही वे लोकसभा टिकट वितरण तक में किसी का हस्तक्षेप नहीं चाहते इसी के चलते दोनों नेताओं को फंसाया गया। लेकिन अब जब सिंधिया के द्वारा सीटों को लेकर चयन की बात समाने आ रही है। तो अब जानकार इसे किसी खास रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।

ऐसे समझें पूरा मामला...
दरअसल अब जो सूचना सामने आ रही है , उसके अनुसार मध्य प्रदेश की सात ऐसी सीटें हैं जिन पर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की राय के बाद उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया जाएगा। इन सातों सीटों पर सिंधिया का सीधा दखल है।

चर्चा है कि यहां से उम्मीदवार उनके कहने पर ही पार्टी द्वारा फाइनल किए जाएंगे। इनमें गुना के अलावा ग्वालियर, इंदौर-विदिशा, धार, भिंड, मुरैना सीट शामिल है।

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वहीं दूसरी ओर ग्वालियर से सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे का नाम दौड़ में शामिल है, लेकिन सिंधिया ने अभी तक उनके नाम पर हामी नहीं भरी है। इसलिए अब तक पार्टी की ओर से इन सीटों पर नाम तय नहीं हो पाए हैं।

प्रदेश की कई सीटों पर कांग्रेस ने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। प्रदेश में सात सीटें ऐसी हैं जिनपर सिंधिया की राय के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। ये सात सीटें गुना, ग्वालियर, इंदौर, विदिशा, धार, भिंड और मुरैना के प्रत्याशी का चयन करने में सिंधिया की भूमिका सबसे अहम है।

विधानसभा चुनाव में गुना विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सिंधिया को इसलिए किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ने की सलाह दी थी।

जिसके बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं सिंधिया इंदौर या विदिशा से चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन शनिवार को मुख्यमंत्री ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंंने कहा कि सिंधिया गुना-शिवपुरी से ही चुनाव लड़ेंगे।

ग्वालियर सीट:मंथन जारी...
इस सीट पर जिला कांग्रेस की ओर से सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे के नाम का प्रस्ताव भी पास किया है। पार्टी के स्थानीय नेताओं का मानना है कि इस सीट पर इस बार प्रियदर्शनी को टिकट दिया जाना चाहिए। लेकिन सिंधिया की ओर से अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

वहीं भिंड में भी इस बार बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यहां से बीजेपी ने वर्तमान सांसद भागीरथ प्रसाद का टिकट काटा है। जबकि कांग्रेस इस सीट पर किसी ऐसे नेता को उतारना चाहती है जो बीजेपी की नारागी को वोट में कैश करवा सके। भिंड को लेकर भाजपा के पूर्व सांसद अशोक अर्गल से सिंधिया की लगातार बातचीत हो रही है।

मंत्री डॉ. गोविंद सिंह से भी सिंधिया और अन्य नेताओं की चर्चा हुई है। इसके अलावा विदिशा व इंदौर में भी कांग्रेस ऐसे प्रत्याशियों को उतारने की कोशिश में है, जिनके चक्रव्यूह में भाजपा फंस जाए, ठीक भोपाल सीट की तरह!