
संघ की बैठक में केंद्रीय विवि, आईआईएम, आईआईटी के कुलपति, इतिहासकार, अर्थशास्त्री और प्रबुद्धजनों का जमावड़ा, बनाई जाएगी अखण्ड भारत की रणनीति
भोपाल. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आनुषांगिक संगठन प्रज्ञा प्रवाह की दो दिवसीय अखिल भारतीय चिंतन बैठक 16-17 अप्रेल को राजधानी के आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में होने जा रही है। इस अवसर पर देश के 22 से अधिक संस्थानों जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईएम, आईआईटी, एनआईटी, विधि विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्राध्यापक व विषय विशेषज्ञ, इतिहासकार, अर्थशास्त्री और सामाजिक संगठनों के 200 से अधिक प्रबुद्धजनों का जमावड़ा रहेगा। आयोजन के केंद्र में उस वैचारिक द्वंद्व के लिए तैयारी और प्रबुद्धों का समूह खड़ा करना है, जो विभिन्न विषयों पर खुलकर मोर्चा संभाल सके। शुक्रवार को दिल्ली से देर शाम सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भोपाल पहुंच गए। शनिवार सुबह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले भी आ जाएंगे। शीर्ष पदाधिकारी दोनों दिन की बैठक में रहेंगे और विभिन्न सत्रों को संबोधित करेंगे। मालूम हो कि संघ देश के सामने उठने वाली आर्थिक-सामाजिक चुनौतियों और देश विरोधी ताकतों की काट के रूप में राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले प्रबुद्धजनों के संगठन को विस्तार देने की रणनीति में जुटा हुआ है, जिसके लिए यह बैठक मील का पत्थर साबित होगी। इस दरमियान संघ के दोनों शीर्ष पदाधिकारियों की निगरानी में देशव्यापी एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाएगा। मालूम हो कि 14 अप्रेल को देहरादून में एक कार्यक्रम के दौरान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया था, जिसमें भविष्य की रणनीति की झलक है। उन्होंने कहा था कि 15 वर्ष में अखण्ड भारत का स्वप्न पूरा हो जाएगा।
कर्णावती और हरिद्वार के बाद प्रज्ञा प्रवाह की बैठक के मायने
गुजरात के कर्णावती में 11-13 मार्च के बीच हुई अभा प्रतिनिधि सभा और उत्तराखण्ड के हरिद्वार में 5-11 अप्रेल के बीच हुई प्रमुख कार्यकर्ताओं और कोर कमेटी की बैठक के मध्यभारत प्रांत भोपाल में हो रही बैठक कई मायने में अहम है। संघ में इस बात पर मंथन चल रहा है कि पिछले कुछ सालों के दरमियान कई सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर वामपंथियों की ओर से स्थापित किए गए मत, विचार या माहौल से देश की छवि पर असर पड़ा। कई बार देश विरोधी ताकतों ने हावी होने का प्रयास किया। संघ अब ऐसे अवसरों और परिस्थितियों के लिए राष्ट्रवादी प्रबुद्धजनों को आगे ला रहा है।
हिंदुत्व के वैश्विक पुनरुत्थान मुख्य विषय है
बैठक का विषय हिंदुत्व का वैश्विक पुनरुत्थान है। इन दिनों विश्व के विभिन्न भागों के लोग हिंदुत्व की ओर पुन: आकर्षित हो रहे हैं। हिंदू जीवन शैली का आग्रह, रुझान और पालन बढ़ता दिख रहा है। यह आकर्षण कोविड त्रासदी के बाद और तेज हो गया था। विश्व स्तर पर योग और आयुर्वेद में रुचि लेने वाले विदेशियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। अमेरिका, यूरोप समेत कई देशों के लोग इंडियन नॉलेज सिस्टम (आईकेएस) के पाठ्यक्रमों में हजारों विदेशी छात्रों और प्रोफेसरों ने प्रवेश लिया है।
- जे. नंदकुमार, अखिल भारतीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह
Updated on:
15 Apr 2022 11:44 pm
Published on:
15 Apr 2022 11:40 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
