
Forest department
Forest department: वन विभाग उस ट्रेन को 'जब्त' करने पर विचार कर रहा है, जिसकी टक्कर से मिडघाट-बुदनी रेलवे ट्रैक पर तीन बाघ शावकों की मौत हो गई। रातापानी वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरने वाली इस ट्रेन की चपेट में तीन बाघ शावक आए थे, जिनमें से एक की मौके पर मौत हुई और घायल बचे दो शावक रेस्क्यू के लगभग 15 दिन बाद उनकी भी मौत हो गई।
प्रदेश के वन अधिकारियों पर वाइल्ड लाइफ कार्यकर्ताओं का दबाव है कि वह असम सरकार के फैसले का उदाहरण लेते हुए रेलवे पर कार्रवाई करें। असम में अक्टूबर 2020 में एक हाथी और उसके बच्चे की मौत पर रेलवे के इंजन को 'जब्त' कर लिया गया था।
सीहोर और रायसेन में बरखेड़ा और बुदनी के बीच 20 किमी लंबे इस रेलवे खंड पर ट्रेनों की चपेट में आने से तीन शावकों सहित 8 बाघों की मौत हो चुकी है। 2015 के बाद से ट्रेन दुर्घटनाओं में 14 तेंदुए और 1 भालू मारा गया।
वन विभाग के एक डिप्टी रेंजर का कहना है कि 'हाथियों की तरह, बाघ भी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची -1 में आते हैं। उनका कहना है कि ट्रेन पायलट अक्सर इस रूट पर 20 किमी प्रति घंटे की निर्धारित गति सीमा को पार कर जाते हैं, ऐसे में बाघों को बचाने के लिए ओवर स्पीडिंग की जांच होनी चाहिए।
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने लोको पायलटों के पर केस दर्ज करने की मांग की है। वन विभाग ने भी पश्चिम मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखकर जांच का आग्रह किया है कि बरखेड़ा और बुदनी के बीच तीसरी रेलवे लाइन के निर्माण की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं। बहरहाल वन विभाग ने अनुपालन की निगरानी के लिए एक समिति का गठन किया है।
वन अधिकारियों का मानना है कि यह त्रासदी टाली जा सकती थी। तीनों शावक 14 जुलाई की रात को ट्रेन की चपेट में आ गए थे। उनका कहना है कि 'पटरियां जंगल से होकर गुजरती हैं। ऐसे में वन्य जीवों की रक्षा के लिए पर्यावरण की शर्तों का पालन करना रेलवे की जिम्मेदारी है।
Published on:
05 Aug 2024 08:49 am
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