
भोपाल।पद्मावत फिल्म रिलीज मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची मध्यप्रदेश सरकार की याचिका खारिज हो गई है। जिसकी सूचना सामने आते ही MP के भोपाल सहित प्रदेश के अन्य जिलों में इसका विरोध protest against film padmavati फिर से शुरू हो गया है।
इसी के चलते मंगलवार को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित कलेक्टर कार्यालय में लोगों ने फिल्म के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिया है, करणी सेना वाले कलेक्ट्रेट के गेट पर बैठ गए हैं।
दरअसल विरोध कर रही करणी सेना सहित राजपूत समाज व कई लोगों का कहना है कि फिल्म पद्मावत (जिसका पहले नाम पद्मावती था) में इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है साथ ही फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों को भी गलत ढंग से पेश किया गया है।
ऐसे समझें पूरा मामला
दरअसल मध्यप्रदेश में रानी पद्मावती के जीवन पर आधारित संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के खिलाफ लंबे समय से विरोध प्रदर्शन protest against padmavati film in bhopal हो रहा है।
जिसके चलते राज्य शासन की ओर से इसकी रिलीज पर रोक तक लगा दी गई। लेकिन इसके बाद कोर्ट द्वारा इसे देश के सभी राज्यों में रिलीज करने का आदेश दे दिया। जिस पर राज्य में लॉ आॅर्डर बिगड़ने protest against padmavat के संदेह को लेकर मप्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर पुनःविचार याचिका लगाई।
यहां CM शिवराज ने कहा कि यहां सिर्फ लॉ एंड आर्डर का नहीं बल्कि भावनाओं का भी सवाल है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कुछ संगठनों की धमकी पर सुनवाई नहीं कर सकते। साथ ही यह भी कहा कि राज्यों से कहा फ़िल्म की रिलीज पर सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
सुप्रीम कोर्ट से झटका:
फिल्म पद्मावत के रिलीज के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची मध्य प्रदेश की सरकार को तगड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म को रिलीज करने के आदेश पर दोबारा से विचार करने वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की। लेकिन, कोर्ट ने राज्य को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया।
सड़क पर लगाया जाम:
प्रदर्शनकारियों ने जब कलेक्टर से मिलने की कोशिश की तो उनसे मुलाकात नहीं हो पाने के कारण प्रदर्शनकारी protest against padmavat film कलेक्ट्रेट के बाहर ही कलेक्टर के इंतजार में बैठ गए। यहां कुछ घंटे बैठे रहने के बाद और लोग भी आ गए। इसके बाद यहां सड़क पर जाम लगा दिया गया है।
मध्यप्रदेश की ओर से फिल्म के प्रदर्शन की वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की बात कही थी। लेकिन अदालत ने कोई दलील नहीं मानी। कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था कायम करना राज्यों की जिम्मेदारी है।
बता दें कि सेंसर बोर्ड से पास होने के बावजूद चार राज्यों ने इस फिल्म को प्रदर्शित न करने का फैसला किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले फैसले में राज्य सरकारों द्वारा लगाई गई रोक को हटाते हुए फिल्म को पूरे देश में रिलीज करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म पर रोक से जुड़ी सारी याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने राज्य सरकारों से कहा कि कुछ संगठनों की धमकी के मद्देनजर फिल्म पर रोक नहीं लगाई जाएगी। ज्ञात हो कि यह फिल्म गुरुवार यानी 25 जनवरी को रिलीज हो रही है। वहीं करणी सेना ने कहा कि पद्मावत की वजह से लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।
कल ही किया था सांकेतिक विरोध...
इससे पहले सोमवार को यानि कल ही ब्यावरा में करणी सेना नेशनल हाइवे पर पद्मावत फिल्म को लेकर जोरदार सांकेतिक विरोध protest against padmavati moive कर चुकी है। इस दौरान दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर घंटों तक जाम लगा रहा था। और इस दौरान दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर तीन-तीन किलोमीटर तक वाहन खड़े हो गए थे। यहां बीच सड़क पर लगाई गई आग के चलते आसमान में उड़ने वाला धुआं कई किलोमीटर दूरी से ही दिख रहा था।
Published on:
23 Jan 2018 02:09 pm
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