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राजधानी कल्चर: जनजातीय संग्रहालय गुंज उठा शिव तांडव स्त्रोत से

उत्तराधिकार में हुई उपशास्त्रीय गायन एवं ओडिसी समूह नृत्य की प्रस्तुतियाँ

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भोपाल

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Vikas Verma

Mar 19, 2018

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भोपाल| मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में परम्परा, नवप्रयोगों एवं नवांकुरों के लिए स्थापित श्रृंखला “उत्तराधिकार” में इस रविवार 18 मार्च 2018 को “देशराज वशिष्ठ (धार) एवं साथियों का उपशास्त्रीय गायन” और “वाणी माधव एवं साथियों द्वारा ओडिसी समूह नृत्य” की प्रस्तुतियाँ संग्रहालय सभागार में हुईं|

कार्यक्रम की शुरुआत ग्वालियर घराने के शास्त्रीय संगीत गायक पं. देशराज वशिष्ठ के शिष्यों ने "माईरी मोसे पिया" एवं "बेरण घर न जा" भजन से की| इसके पश्चात पं. देशराज वशिष्ठ ने भारतीय संगीत पद्धति के "राग हंस ध्वनि" में निबद्ध रचना "जयति जय माँ अम्बे" के साथ मंच पर कर्णप्रिय संगीत प्रस्तुत किया|

संगीत सभा को आगे बढ़ाते हुए अपने गायन में रागों की सुन्दरता दिखाते हुए राग मिश्र खमाज में "श्याम बिना नाही चैन" की प्रस्तुति दी| इसके पश्चात् राग भैरवी में निबद्ध "भवानी वे अम्बे" गाकर अपने गायन को विराम दिया| देशराज वशिष्ठ का साथ गायन में वंदना दुबे एवं अभिषेक श्रीवास्तव ने दिया|

संगतकारों में तबले पर पंकज राठौर ने, सारंगी पर शफिक खान ने, हारमोनियम पर अभिषेक श्रीवास्तव ने, तानपुरे पर ओमप्रकाश कुडे और अरविन्द डोडवे ने साथ दिया|

पं.देशराज वशिष्ठ ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता दुर्गा प्रसाद से प्राप्त की| इसके पश्चात् पं. संजय देवले से विधिवत शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की| शास्त्रीय संगीत में डॉक्टरेट पं. देशराज वशिष्ठ ने देश भर में आयोजित होने वाले संगीत समारोहों में शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियाँ दी हैं|

उपशास्त्रीय गायन के पश्चात् इसी क्रम में गुरुशिष्य परम्परा के अंतर्गत आयोजित अगली प्रस्तुति में वाणी माधव (गुड़गाँव) ने अपनी शिष्याओं के साथ प्रेम-भाव, देवताओं और मानव से जुड़ा ओडिसी समूह नृत्य प्रस्तुत किया| अपने नृत्य की शुरूआत उन्होंने भगवान शिव की स्तुति के साथ, शक्ति और सुन्दरता का बखान करते हुए शिव तांडव स्त्रोत " जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले" के साथ की| इसके पश्चात् कलाकारों ने दर्शकों के समक्ष राग-कल्याणी में निबद्ध रचना "पल्लवी" की मनमोहक प्रस्तुति दी| नृत्य प्रस्तुतियों की श्रृंखला में अगली प्रस्तुति में वाणी माधव ने एकल- अभिनय नृत्य प्रस्तुत कर राधा–कृष्ण के प्रेम लीलाओं के साथ राग–मलिका, ताल-मलिका में निबद्ध रचना "भजामि विंध्य वासनी" में पार्वती के तीन रूपों का सुन्दर वर्णन मंच प्रस्तुत किया|

अंतिम प्रस्तुति के रूप स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित कर कलाकारों ने राग भैरवी में निबद्ध रचना "मोक्ष" की प्रस्तुति दी एवं कार्यक्रम का समापन किया| वाणी माधव के साथ उनकी शिष्याओं अहाना राय, भाग्यश्री गुप्ता, प्रिया कुम्हार, अंजलि पोलाईट, अनन्या घोष ने प्रस्तुतियां दी|

"नृत्य धारा" ओडिसी नृत्य संस्थान की संचालक वाणी माधव ने गुरू गजेंद्र पांडा, सुधाकर साहू और दुर्गाचरन रणबीर के मार्गदर्शन में 6 वर्ष की उम्र से ही ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था| अपनी नृत्य प्रस्तुतियों से देश–विदेश में ख्याति अर्जित की है एवं अनेक सम्मान प्राप्त किए हैं|