
भोपाल. भारतीय शास्त्रीय संगीत पर पिछले सात साल से एक ऐसा कलेंडर जारी हो रहा है जिसमें तारीख के साथ साथ हर साल संगीत विधा की एक शैली पर गहन जानकारी भी होती है। साल 2022 का कलेंडर शास्त्रीय संगीत की सबसे पुरानी शैली ध्रुपद पर आधारित है। रागगीरी के सातवें कैलेंडर का विमोचन पद्मश्री ध्रुपद गायक उस्ताद वासीफुद्दीन डागर ने किया।
रागगीरी कैलेंडर का विमोचन एक ऑनलाइन कार्यक्रम में किया गया जिसमें शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात पंडित उदय भवालकर और उस्ताद बहाउद्दीन डागर शामिल हुए। साल 2022 के इस कैलेंडर में ध्रुपद गायकी के बारे में विस्त्रित जानकारी दी गई है वही हर माह के पन्ने पर देश के कई महान कलाकारों को भी शामिल किया गया है।
यह कलेंडर शास्त्रीय संगीत ध्रुपद पर आधारित है इसलिए इसमें स्वामी हरिदास, मियाँ तानसेन, बैजू बावरा से लेकर मौजूदा दौर के सभी बड़े ध्रुपद कलाकारों को जगह दी गई है। देश में 2022 भारत की स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है और ध्रुपद भारतीय शास्त्रीय संगीत के अमृत की तरह माना जाता है।
रागगीरी कैलेंडर का विमोचन पर पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर ने कहा कि इस कैलेंडर से आने वाली पीढ़ियां को इस महान गायन शैली ध्रुपद के बारे में जानकारी मिलेगी। उस्ताद बहाऊद्दीन डागर और पंडित उदय भवालकर ने भी रागगीरी कलेंडर को भारतीय संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए सराहनीय कैलेंडर बताया।
रागगीरी कलेंडर के प्रकाशन का यह सातवां साल है, रागगीरी शास्त्रीय संगीत पर आधारित कैलेंडर प्रकाशित करता आया है। इस कलेंडर को प्रकाशित करने के पीछे संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला के प्रयास और सहयोग है जो संस्कृति को बढावा देने के लिए एक कलेंडर की परिकल्पना को साकार कर सके। साल दर साल प्रकाशित हो रहे रागगीरी के कलेंडर से संगीत जगत के साथ साथ आम लोगों को भी भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय गायन के बारे में विस्त्रित जानकारी मिलती रही है।
देखिए रागगीरी का कैलेंडर के विमोचन का वीडियो...
Published on:
04 Jan 2022 08:23 pm
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