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सावधान! रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी, ट्रेनिंग दिलाई, 15 लाख लेकर दे दिया फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर

Railway Job Fraud Case : बेरोजगार युवक से उसके 10 साल पुराने दोस्त और उसके रिश्तेदार ने 15 लाख रूपए ठग लिए। बदले में उसे ट्रेनिंग भी दिलाई और फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर भी दे दिया।

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Railway Job Fraud Case

Railway Job Fraud Case : रोजगार के लिए भटक रहे युवा अच्छी नौकरी पाने के लिए भटक रहे हैं। ऐसे युवाओं पर अब ठगों की नजर पड़ गई है। ये जालसाज नौकरी ( Railways job ) दिलाने के नाम पर खासकर बरोजगार युवाओं को अपना शिकार हो रहे हैं। इसकी ताजा बानगी देखने को मिली मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में, यहां एक बेरोजगार युवक को रेलवे में नौकरी ( job in Railways ) लगवाने के नाम पर उसके दोस्त और रिश्तेदार ने ही धोखाधड़ी ( Fraud Case ) का शिकार बना लिया। बताया जा रहा है कि दोनों मिलकर बेरोजगार युवक से 15 लाख ( 15 lakh fraud )रुपए ठग लिए और बदले में रेलवे के फर्जी दस्तावेज ( fake appointment letter ) थमा दिए। उन दस्तावेजों की बिना पर नौकरी न मिलने पर युवक द्वारा जब दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो पता चला कि उसके दस्तावेज ही फर्जी हैं।

धोखाधड़ी का पता चलने पर जब युवक ने अपने रुपए वापस मांगे तो उन्होंने रुपए देने से इंकार कर दिया। यही नहीं, आरोप है कि बात बढ़ाने पर जान से मारने की धमकी तक दे डाली। पीड़ित का कहना है कि उसने जैसे तैसे कर्ज लेकर नौकरी पाने के लिए रुपए इकट्ठा कर इन्हें दिए थे। उसका मानना था कि नौकरी लगने पर धीरे धरे सभी रूपए लौटा देगा। लेकिन अब नोकरी नहीं लगी, जिसके चलते कर्ज लेने वालों से परेशान आने का खतरा मोल लेते हुए जान की परवाह किए बिना युवक ने एसपी ऑफिस पहुंचकर मामले की शिकायत की। फिलहाल, आला अफसरों ने मामला दर्ज कर जांच के आदार पर उचित कारर्वाई करने के आदेश दे दिए हैं।

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दोस्त की बातों में आ गया युवक

आपको बता दें कि, ग्वालियर के लक्ष्मीगंज में रहने वाला बेरोजगार युवा अनिल पाल यूनिवर्सल मेडिकल पर काम करता था। अनिल पाल और अभिषेक शर्मा के बीच 10 साल से दोस्ती थी। अभिषेक डबरा के मगरौरा का निवासी है और ग्वालियर के आमखो पर किराए के कमरे में रहकर अपने जीजा पंकज शर्मा के साथ श्याम गंगा मेडिकल पर काम करता है। अभिषेक शर्मा ने अनिल को झांसा दिया कि उसके जीजा की रेलवे में बड़ी पहचान है और वहां उसकी बैक डोर से लिपिक की नौकरी लगवा सकता है। अनिल पाल उसकी बातों में आ गया। उसने करीब ढाई लाख रुपए उसे ऑनलाइन दे दिए।

अभिषेक शर्मा और उसके जीजा पंकज शर्मा ने विकास यादव, राजेंद्र यादव का हवाला देकर अनिल को भरोसा दिलाया था कि इनकी रेलवे में अच्छी पहचान है। पहले भी कई लोगों को नौकरी लगवा चुके हैं। अनिल ने अपने परिवार के लोगों से बातचीत की। इसके बाद कई जगहों से कर्ज के तौर पर रूपए लिए और सौदे के 15 लाख रुपए दे दिए। रूपए मिलते ही सभी आरोपी, अनिल पाल का मेडिकल कराने दिल्ली ले गए। वहीं उसे कुछ कागजात दिए।

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रूपए लेकर थमाया फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर

कागजात लेकर वाप घर लौटने के बाद अभिषेक शर्मा के घर पर बाकी के करीब साढ़े बारह लाख रुपए दे दिए। इस दौरान अभिषेक शर्मा के अलावा नितिन तिवारी, विकास यादव, राजेंद्र यादव और दीपा शर्मा भी मौजूद थी। इन लोगों ने पैसे लेने के बाद अगले दिन अनिल को अपने घर बुलाया जहां दीपा शर्मा ने अनिल को साउथ ईस्टर्न रेलवे का अपॉइंटमेंट लेटर भी दे दिया।

शक होने पर की पूछताछ

इसके बाद ठगों ने अनिल को घमरिया रेलवे स्टेशन टाटानगर झारखंड में ट्रेनिंग के लिए बुलाया। जहां कमर्शियल क्लर्क ग्रुप सी के विभाग का आईडी कार्ड, मेडिकल सर्टिफिकेट, उत्तर रेलवे के दस्तावेज ले जाने को बोला। दोस्त अभिषेक शर्मा भी अनिल के साथ झारखंड गया था। जहां पहले से मौजूद इन लोगों ने उसे एक स्थान पर ट्रेनिंग सेंटर के नाम पर ले गए और एक सप्ताह तक ट्रेनिंग पर भी रखा। लेकिन जब अनिल को शक हुआ तो वो तुरंत ही लौटकर ग्वालियर रेलवे कार्यालय पहुंचा और उसने इन दस्तावेजों का सत्यापन कराया। यहां रेलवे से उन्हें जानकारी दी गई कि जो दस्तावेज वो लेकर आया है, वो फर्जी हैं।

पैरों तले खिसक गई जमीन

अधिकारी के मुंह से ऐसी बात सुनकर अनिल के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने ठगों से अपने दिए हुए पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने उसे पैसे वापस करने से इंकार करते हुए जान से मारने की धमकी दे डाली। जिसके बाद परेशान होकर अनिल पाल ने पुलिस अधिकारियों से मिलकर इस मामले में न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। वहीं पुलिस अधिकारी ने झांसी रोड थाना प्रभारी को इस पूरे मामले में गहराई से जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए है।